SUC मसले पर ट्राई का यू-टर्न

अपने ही स्पेक्ट्रम मूल्यांकन फार्मूले को किया खारिज आखिरकार ‘स्पेक्ट्रम यूसेज चार्जेस’ यानि SUC पर ट्राई ने अपनी सिफारिशें दे ही दी। पर अगर आप स्पष्ट, सरल और सर्वमान्य फार्मूले की उम्मीद कर रहे थे तो आपको जरूर निराशा होगी। कानून तर्कसंगत अटार्नी जनरल के फार्मूले को दरकिनार कर ट्राई ने स्पेक्ट्रम मूल्यांकन के लिए … Read more

अहँकार

माननीय उच्चतम न्यायालय के अरुणाचल प्रदेश के बारे में ताजा फैसले के परिपेक्ष दक्षिण पंथी पार्टी समर्थक मेरठ से प्रकाशित एक अखबार के संपादकीय को पड़ने से ऐसा लगता है की संपादक माननीय उच्चतम न्यायालय को ही कटघरे में खड़ा कर रहा है जब वह कहता है ” अच्छा होता की सुप्रीम कोर्ट विधान सभा … Read more

सागर मंथन “अक्षुण लोकतंत्र”

अब ऐसा लगता है कि हम एक जीवंत लोकतंत्र में प्रवेश द्वार के पास पहुँचने को आतुर है ! ठीक भी है कि कार्य पालिका जब विधायिका की पीठ पर बैठकर लोकतान्त्रिक व्यवस्था को अपने हित साधन के रूप में तोड़ने मरोड़ने लगे तो लोक तंत्र के तीसरे स्तम्भ को अपनी भूमिका लेनी ही पड़ती … Read more

विद्यार्थी मित्र कोर्ट क्यों गया ?

माननीय शिक्षा मंत्री जी , सादर नमन मैं विद्यार्थी मित्र निवेदन करना चाहता हु कि कितना हास्यास्पद और विचित्र लगता हे कि जब सरकार ये कहे कि हमने विद्यार्थी मित्रो को नही हटाया,ये खुद कोर्ट गए और कोर्ट ने असंवैधानिक ठहराया। मैं यहाँ पूछना चाहूँगा विद्यार्थी मित्र कोर्ट क्यों गया ?आप शायद नही जानते हो … Read more

AFSPA या मौत का फरमान अफस्पा ?

1947 की स्वतंत्रता के बाद हमारे देश की जो दशा या दिशा थी उससे नहीं लगता था की भारत अक्षुण और सार्वभौम राष्ट्र के रूप में विकसित हो पायेगा ? क्योंकि 600 वर्षों की मुस्लिम दासता और 200 वर्षों की अंग्रेजी दासता से मुक्ति के रूप में देशी राजे रजवाड़ों को अपने स्वरुप में स्वतंत्र … Read more

साथ लेना और साथ देना, सच या झूँठ

हम यह कैसे मान ले कि हमारे प्रधान सेवक झूँठ भी बोलते है, वैसे ना मनाने का कोई कारण भी है तो नहीं है ? यानि हमे मानना ही पड़ेगा कि अपने सेवक जी झूँठ नहीं बोलते यह तथ्य भी सर्विदित है कि 125 करोड़ की देश की जनता के प्रधान को झूँठ बोलने की … Read more

भूखे को भूख, खाए को खाजा…!!

तारकेश कुमार ओझा भूखे को भूख सहने की आदत धीरे – धीरे पड़ ही जाती है। वहीं पांत में बैठ जी भर कर जीमने के बाद स्वादिष्ट मिठाइयों का अपना ही मजा है। शायद सरकारें कुछ ऐसा ही सोचती है। इसीलिए तेल वाले सिरों पर और ज्यादा तेल चुपड़ते जाने का सिलसिला लगातार चलता ही … Read more

स्मार्ट सिटीज या अजगर ?

अगर मन की बात और उपदेशों से ही ये देश चल सकता है और गरीबी उन्मूलन केवल शहरों के उच्चीकरण से हो जायेगा तो यह तो एक बहुत ही अच्छी बात है और इसका स्वागत गरीबों को तो अवश्य ही करना चाहिए ? उपदेस का मतलब हमे समझ नहीं आया की कोई शहर गरीबी को … Read more

ये मौतें कब तक ……….?

आज जब कश्मीर जैसे संवेदनशील एरिया में एक ही दिन में आतंकी हमले 8 जवान शहीद होते है और बीसियों घायल होते है तो इन हसंते खेलते जवानों को जब एक साथ 8 ताबूतों में देखा तो दिल दहल गया, क्योंकि इन ताबूतों में न तो कोई नेता था न कोई नेता का बेटा था … Read more

बोया पेड़ बबूल का …………..?

NSG की सदस्यता न मिलने पर विपक्ष की ओर से हो रही आलोचना के परिपेक्ष में भक्तो और भक्तिनो का पारा सातवे आसमान तक पहुँच गया ! एक भक्तिन ने टिप्पणी की , कि कुछ लोग NSG सदस्यता न मिलने का जश्न मना रहे है, और जिस डाल पर बैठे हैं उसी को काट रहे … Read more

तो भाजपा संघटन को भी नही है सरकार की योजनाओ की जानकारी

बिना जानकारी के जनता तक कैसे पहुँचेगा जनकल्याणकारी योजनाओ का लाभ, फिर सरकार की योजनाओं का फायदा कौन उठा रहा है ? आज के प्रमुख दैनिक अखबारो में जब पढ़ा की भाजपा संघठन के जिलाध्यक्षो को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओ की जानकारी नही है, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा ली गई संघठन की बैठक में जब … Read more

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