हमारी तप-संस्कृति है संलेखना, इसे कैसे छोड़ दें…राष्ट्रसंत पुलक सागर

हमने न्याय व्यवस्था का सदैव सम्मान किया है। न्यायालय के प्रत्येक निर्देश को हमेशा सिर माथे लिया है। हमने न्यायपालिका को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ मानते हुए उसके सभी आदेशों एवं निर्णयों के प्रति पूर्ण सम्मान भाव रखा है, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट के ताजा निर्णय से मन व्यथित है। हम न्यायालय के निर्णय पर प्रश्नचिन्ह … Read more

मीडिया तंत्र किसी ना किसी हाथो बिका हुआ है

मैं आपको बताना चाहूँगा की भारत का मीडिया तंत्र जिसको भारत के लोकतंत्र का सबसे अहम् चौथा स्तम्भ माना जाता है आज कल उस भारत का मीडिया तंत्र के बारे मे ऐसा प्रतीत होता है की वो मीडिया तंत्र किसी ना किसी हाथो बिका हुआ है। ये हक़ीक़त वो मीडिया तंत्र या उनकी कंपनिया ही … Read more

मेयर को चुने जाने के दौरान राजनीति का घटिया स्तर दिखाई दिया

हां मैंने राजनीति के सिद्धांतो को सरेआम नीलाम होते देखा है । मैंने अपना मेयर बनवाने के खेल में राजनीति के होते घटिया स्तर को देखा है मैंने जिम्मेदार नेताओ के हाथो जनता की उम्मीदों का गला घोटते देखा है । मैने अनुशासन , सुचिता और जन भावना की बात करने वाली पार्टी की इज्जत … Read more

चुनाव में जीता कौन ?

नगर निगम के बीस अगस्त को आए परिणाम से हारा कौन और जीता कौन ? सबके लिए इसके अलग-अलग मायने हैं। आंकड़ों में भाजपा जीत की सीमा पर आकर थम गई तो कांग्रेस भौंचक्की है, अरे इतनी सीट की तो उम्मीद ही नहीं थी। ध्यान देते तो शायद बहुमत ही ले आते। भाजपा राष्ट्रीय और … Read more

संथारा पर रोक : चंद सवाल

देश मेँ जैन समाज एक सभ्य व अहिंसा के प्रतीक के रुप मेँ जाना जाता है इनके सिद्धांत संपूर्ण ब्रमांड में किसी भी जीव की हिंसा तो दूर हिंसात्मक विचारधारा की भी इजाजत नहीँ देता ! एेसे उच्च कोटी विचारधारा वाले धर्म के संथारा समाधि राजस्थान हाईकोर्ट को आत्महत्या लगती हैे यह समाज अदालत की … Read more

अश्लीलता और साधू संत

इन दिनों राधे माँ नाम की साध्वी के चर्चे जोरो पर हैं , आरोप यह लग रहा है की वह अश्लीलता परोसती थी , भक्तो के साथ एकांत में उपदेश देती थी आदि । अभी कुछ दिन पहले ही धर्म गुरु आशाराम बापू भी बलात्कार के जुर्म में जेल की हवा खा रहें हैं ,धर्म … Read more

नौ दिन चले अढ़ाई कोस ?

उत्तर भारत की एक प्रसिद्ध कहावत है ! ” नौ दिन चले अढ़ाई कोस ” यानि अगर आप जब यह कहते हो की हम फलां फलां काम को अमुक दिनों में कर देंगे और निर्धारित समय में अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते तो क्या होता है? यही होता है लक्ष्य पर न पहुंचने वाले … Read more

अभी तो सौ साल भी नहीं हुए

स्वाधीनता दिवस के एक दिन पहले कुछ लोगों से इस बात की चर्चा हुई कि 15 अगस्त 2015 को मनाया जा रहा स्वाधीनता दिवस कौनसा है। एक विद्वान के अनुसार यह 67 वां स्वाधीनता दिवस है। दूसरे के मुताबिक यह 68 वां है तो तीसरे महाशय इसे 69 वां स्वाधीनता दिवस मानने पर अड़े थे। … Read more

भाजपा का राज है या कांग्रेस का

भारतीय थल सेना की महत्त्वपूर्ण नसीराबाद छावनी का शहरी क्षेत्र गत पांच अगस्त से बंद पड़ा है। शहरी क्षेत्र में बूचडखाना हटवाने की मांग को लेकर पूरा नसीराबाद एकजुट है। 14 अगस्त को क्षेत्रीय सांसद और केन्द्रीय जलसंसाधन राज्यमंत्री सांवरलाल जाट ने भी नसीराबाद पहुंचकर बाजार खुलवाने के प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। इससे … Read more

स्नातक होनी चाहिए पार्षद योग्यता

नेतागिरी करने वाले कई छुटभैये निगम चुनाव में खडे़ होने से इसलिए महरूम हो गए क्योंकि वे दसवीं कक्षा पास नहीं है। कई ने अपनी इस कमजोरी को छिपाने के लिए मूंछों पर ताव देते हुए कहा कि अपन ने तो सोच लिया जी कि इस दफे इलेक्शन में खडे़ नी होना……अब वो जमाना ई … Read more

शर्म उनको मगर आती क्यों नहीं ?

शर्म, वैसे तो शर्म स्त्रीलिंग होती है और जब शर्म किसी फीमेल को आती है तो वह शर्म से लाल हो जाया करतीं है ।परंतु यह मर्दों को भी होती है । इसलिए हम तो बस मर्दों को होने वाली शर्म की ही बात करेंगे । शर्म वह भी किसी ख़ास मर्द यानी प्रधान मंत्री … Read more

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