प्रकाश जायसवाल का बयान शर्मनाक

विद्या की देवी-सरस्वती, धन की देवी-लक्ष्मी, शक्ति की देवी-दुर्गा के रूप मे जहा महान नारियो को पूजा जाता है, उसी देश मे हमारे कोयला मंत्री जी श्री प्रकाश जायसवाल का बयान आता है “-नई नई जीत और नई नई शादी का अलग ही महत्व होता है, जैसे जैसे समय बीतता जाता है जीत पुरानी हो … Read more

खुद मनमोहन सिंह ने किया था एफडीआई का विरोध

अपने पिछले ब्लॉग में मैंने स्मरण कराया था कि एनडीए सरकार के समय कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन मुख्य सचेतक श्री प्रियरंजन दासमुंशी ने खुदरा में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश सम्बन्धी योजना आयोग की सिफारिश का संदर्भ देते हुए वाजपेयी सरकार द्वारा ऐसा ‘राष्ट्र-विरोधी‘ काम करने की दिशा में बढ़ने की निंदा की थी। वाणिज्य मंत्री के रूप में श्री … Read more

अरविन्द कोजरीवल के नई पार्टी बनाने के विचार पर कविता

महत्व ईमानदारी का है, महत्व पार्टी बनाने का नही | दवा का महत्व रोग काटने का है,मिठास या खारी का नही | होसले बुलंद हो तो,समस्या हल्की या भरी का नही | हे अर्जुन रोकने वाला कोई भी नही,काम जो ईमानदारी से करो| पक्षपात निर्णय में न हो, काम सब देश हित के लिया करो … Read more

इंसानियत क़ी राह मे इंसान चाहिए

बचपन मे एक गाना सुनती थी ” तू हिन्दू बनेगा , या मुसलमान  बनेगा ..इन्सान  की औलाद है इंसान बनेगा ” और एक गाना  ” देख तेरे संसार  क़ी हालत क्या हो गयी भगवान , कितना बदल गया इंसान ” – पर आज देखने  को कही मिल रहा है ? -इंसान और इंसानियत  कही खो  … Read more

कुछ पल और …

नहीं जाना चाहता मैं तुम से दूर कुछ पल और तुम्हारे पास रहने दो खोने के डर से पाने के शिखर तक उस वीरान बस्ती से इस अनजान शहर तक जो कुछ भी पाया सब कुछ तुम्हारा है … यादों की लहर में बहने दो … कुछ पल और तुम्हारे पास रहने दो … अविस्मरणीय … Read more

महान विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय

पंडित दीनदयाल उपाध्याय सन् 1953 से 1968 तक भारतीय जनसंघ के नेता रहे। वे एक प्रखर विचारक, उत्कृष्ट संगठनकर्ता तथा एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने जीवनपर्यन्त अपनी व्यक्तिगत ईमानदारी व सत्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों को अक्षुण्ण रखा। वे भारतीय जनता पार्टी के जन्म से ही पार्टी के लिए वैचारिक मार्गदर्शन और नैतिक प्रेरणा के स्रोत … Read more

ख्वाइश …

जब ख्वाइश ख़्वाबों के सांचे में ढल जाती हैं खुशनुमा जिंदगियां अक्सर बदल जाती हैं दौड़ मोहब्बत की जीत पाना मुश्किल हैं इसमें हकीकत हसरत से आगे निकल जाती हैं ये दिलवालों का शहर है दिमागदारों हैरान मत हो सिक्के नहीं यहाँ, प्यार की कौडियाँ भी चल जाती हैं नहीं मुमकिन इस तपिश को थामे … Read more

पैसे तो कोइले की खानों में है

कल तक मनमोहन को सीधा-साधा समझने वाले लोग  उनके अन्दर के भाव  समझ नहीं पा रहे थे व  फेसरीडिंग करने वालों को भी श्रीमान की ढाडी सफल नहीं होने दे रही थी | और इनका कम बोलना विचारों की थाह नहीं लेने दे रहा था परन्तु अबकी बार तो श्रीमान ऐसे बोले की जनता को … Read more

दीपक की लौ में पढ़ाने की मुहिम

‘‘कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं हो सकता, तबीयत से एक पत्थर तो उछालों यारों।’’ बदलाव का माद्दा रखने वाले 20 वर्षीय पूरण कालबेलिया ने पत्थर उछाला है। यायावर कौम से संबंध रखता है पूरण। बीन बजाकर सांप को नचाने वाली कालबेलिया कौम का पूरण चिमनी के उजाले में अपने समुदाय को शिक्षित … Read more

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

आज कल आधुनिक यू और पड़े लिखे लोगो के बीच ये काफी चर्चा का विषय है हर एक की अपनी परिभाषा है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ये कतई मतलब नहीं है की आप किसी के धर्म और समाज के बारे में उल्टा सीधा कुछ भी कह सकते हो हाँ ये जरुर है की अभिव्यक्ति की … Read more

जैसे वोट पेड़ पर लगते हैं!

प्रधानमंत्रीजी ने कई बार ऐसे जुमले प्रयोग में लिए हैं जो अप्रासंगिक हैं। जैसे उन्होंने कई बार कहा कि ‘‘मेरे पास जादू की कोई छड़ी नहीं है’’ या फिर उनका ताजा बयान कि ‘‘पैसे पेड़ पर नहीं उगते।’’ मुझे इस बात पर त्रेतायुग में रामायण काल का वह प्रसिद्ध दोहा याद आता है जब अपने … Read more

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