25 अगस्त, प्रथम गोरखा बलिदानी दुर्गा मल्ल के शहादत दिवस पर विशेष

“यूं तो दुनिया में सभी आते हैं मरने के लिए   मौत उसकी है खास जिसका जमाना करे अफसोस।”       प्रथम गोरखा शहीद दुर्गा मल्ल (1 जुलाई 1913- 25 अगस्त, 1944), आजाद हिन्द फौज के गोरखा सैनिक जो “कदम कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा…” गाते हुए फांसी का फंदा चूमने … Read more

अंतरिक्ष में भारत की निजी शक्ति एवं वैज्ञानिक सामर्थ्य की उड़ान

भारत की अंतरिक्ष यात्रा अब केवल सरकारी संस्थानों और वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रह गई है। यह यात्रा आज नवाचार, उद्यमिता, युवा प्रतिभा, निजी पूंजी और वैश्विक महत्वाकांक्षा के ऐसे संगम में बदल रही है, जिसने भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की दिशा में एक नई गति प्रदान की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के … Read more

पारस्परिक प्रेम सोहार्द स्नेह का अटूट बंधन राखी

रक्षाबंधन  का अर्थ है   किसी को अपनी रक्षा के लिए बांध लेना। इसीलिए इस पर्व पर राखी बांधते समय बहन कहती है ‘हे भैया! मैं तुम्हारी शरण में हूँ, मेरी सब प्रकार से रक्षा करना।’  फलस्वरूप भाई भी अपनी बहन को जीवन पर्यन्त रक्षा करने का वचन देते हैं। भारतीय परम्परा में विश्वास का बन्धन … Read more

तिरंगे की शान के लिए शहीद हुए गुलाब सिंह लोधी (91 वें बलिदान दिवस 23 अगस्त 2026 पर विशेष)

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास ऐसे वीर-वीरांगनाओं की कहानियों से भरा पड़ा है, जिनके योगदान को वह मान्यता नहीं मिल सकी, जिसके वे वास्तविक रूप से हकदार थे। ऐसे ही अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी थे, जिनका योगदान भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी रहा। लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि इतिहासकारों ने अमर शहीद गुलाब … Read more

युवाओं को 18 वर्ष की आयु में मताधिकार देने वाले राजीव गांधी

डिजिटल इंडिया के आर्किटेक्ट और सूचना तकनीक दूरसंचार क्रांति के जनक एवं पंचायती राज के सशक्तिकरण के प्रणेता तथा युवाओं को 18 वर्ष की आयु में मताधिकार देने वाले राजीव गांधी  प्रधानमंत्री रहते हुए स्व गांधी ने कई महत्वपूर्ण काम किए जिन्होंने देश के विकास को नई दिशा प्रदान की | राजीव गांधी को डिजिटल … Read more

मानसून का बुखार: गंभीर होने से पहले पहचानें चेतावनी के संकेत

जयपुर, 18 अगस्त 2026: मानसून गर्मी से राहत लेकर आता है, लेकिन इसके साथ आने वाली नमी, बारिश और जगह-जगह जमा पानी मौसमी संक्रमणों के लिए अनुकूल परिस्थितियां भी पैदा करते हैं। इस मौसम में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियां आम होती हैं। वहीं, टाइफाइड, डायरिया और बुखार के अन्य कारण भी सामने आ सकते हैं, जिन पर समय रहते ध्यान देना … Read more

तुलसीदासः भक्ति, लोकमंगल और जीवन-दर्शन के अमर व्याख्याता

तुलसीदास जयंती (19 अगस्त 2026) भारत की संत-परंपरा में गोस्वामी तुलसीदास का स्थान केवल एक महान कवि अथवा रामभक्त के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन के लोकनायक और सांस्कृतिक राष्ट्रनायक के रूप में है। श्रावण शुक्ल सप्तमी को मनाई जाने वाली तुलसीदास जयंती हमें उस महापुरुष के स्मरण का अवसर देती है, जिसने रामकथा … Read more

अल्पसंख्यकों की असुरक्षा से आतंकवाद तक पाक का यथार्थ

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिया गया हालिया बयान केवल एक जहरीली एवं कड़वी राजनीतिक टिप्पणी ही नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की उस मानसिकता का आईना है, जिसमें भारत के प्रति कटुता, अविश्वास, नफरत और वैचारिक विरोध आज भी गहरे पैठे हुए हैं। जरदारी ने ‘अखंड भारत’ की … Read more

1857 का प्रथम स्वाधीनता संग्राम और महर्षि दयानंद सरस्वती : इतिहास के विस्मृत अध्याय को पढ़ने का समय

भारत के इतिहास में 1857 का वर्ष केवल एक विद्रोह, सैनिक असंतोष अथवा अचानक भड़की हुई हिंसक घटना का वर्ष नहीं था। वह भारतीय जनमानस में लंबे समय से संचित असंतोष, स्वाधीनता की आकांक्षा और विदेशी सत्ता से मुक्ति की चेतना के एक विराट विस्फोट का वर्ष था। 10 मई 1857 को मेरठ से उठी … Read more

सावन के तीसरे सोमवार को लगता है आगरा का सुप्रसिद्ध कैलाश मेला (विशेष आलेख)

हमारे भारत देश में एक समृद्ध आध्यात्मिक और धार्मिक विरासत के साथ, कई धर्मों का पालन किया जाता है। नतीजतन धार्मिक त्योहारों की एक बड़ी संख्या को मनाया जाता है। ऐसा ही एक त्योहार आगरा का सुप्रसिद्ध कैलाश मेला है। आगरा का यह सुप्रसिद्ध कैलाश मेला हर वर्ष सावन महीने के तीसरे सोमवार को लगता है। कैलाश मेला हर साल बड़ी धूमधाम से आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में यमुना के किनारे स्थित कैलाश मंदिर पर लगता है। कैलाश मेला सावन महीने में भगवान शिव के सम्मान में मनाया जाता है। वैसे तो साल के हर सोमवार को आगरा के कैलाश मंदिर पर भक्तों का जमावड़ा लगता है, लेकिन सावन महीने में कैलाश मंदिर का मनमोहक नजारा होता है। हर तरफ भक्ति की बयार बही होती है और भगवान शिव के भक्त दूर दराज के क्षेत्रों से दर्शन करने के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि आगरा के कैलाश मंदिर पर मांगी गयी हर मनौती भगवान शिव पूर्ण करते हैं। कैलाश मेले पर आगरा का माहौल बहुत हंसमुख होता है। आगरा के लोग कैलाश मेले को एक पर्व की तरह मनाते हैं। कैलाश मेले के दिन आगरा के स्थानीय प्रशासन द्वारा सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है और इस दिन आगरा के सभी स्कूल-कॉलेज, सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों में छुट्टी होती है। मेले के अवसर पर जो बड़ी भीड़ इकट्ठा होती है, उनकी भक्ति और खुशी देखने लायक होती है। इस दिन कैलाश मंदिर के कई-कई किलोमीटर दूर तक खेल-खिलौनों, खाने-पीने सहित अनेकों दुकानों की स्थापना की जाती है। इस दिन यमुना किनारे कैलाश मंदिर पर हजारों कांवड़िये दूर-दूर से कांवड़ लाकर भगवान शिव की भक्ति से ओत-प्रोत होकर बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए कांवड़ चढ़ाते हैं। वैसे तो सावन के हर सोमवार को आगरा के सभी सुप्रसिद्ध शिव मंदिरों में कांवड़ चढ़ाई जाती हैं लेकिन सावन के तीसरे सोमवार को कैलाश मंदिर पर कांवड़ चढाने का अपना अलग ही महत्व है। इस दिन कैलाश मंदिर के किनारे से गुजरने वाली यमुना में स्नान करना भी काफी शुभ माना जाता है, इसलिए भक्त मंदिर में शिवलिंगों के दर्शन करने से पहले यमुना में जरूर स्नान करते हैं। माना जाता है कि आगरा के कैलाश महादेव का मंदिर पांच हजार वर्ष से भी अधिक पुराना है। मंदिर में स्थापित दो शिवलिंग मंदिर की महिमा को और भी बढ़ा देते हैं। कहा जाता है कि कैलाश मंदिर के शिवलिंग भगवान परशुराम और उनके पिता जमदग्नि के द्वारा स्थापित किए गए थे। महर्षि परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि का आश्रम रेणुका धाम भी यहां से पांच से छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर का अपना अलग ही एक महत्व है। त्रेता युग में भगवान विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव की आराधना करने गए। दोनों पिता-पुत्र की कड़ी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। इस पर भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने उनसे अपने साथ चलने और हमेशा साथ रहने का आशीर्वाद मांग लिया। इसके बाद भगवान शिव ने दोनों पिता-पुत्र को एक-एक शिवलिंग भेंट स्वरूप दिया। जब दोनों पिता-पुत्र यमुना किनारे अग्रवन में बने अपने आश्रम रेणुका के लिए चले (रेणुका धाम का अतीत श्रीमद्भागवत गीता में वर्णित है) तो आश्रम से 6 किलोमीटर पहले ही रात्रि विश्राम को रुके। फिर सुबह होते ही दोनों पिता-पुत्र हर रोज की तरह नित्य कर्म के लिए गए। इसके बाद ज्योर्तिलिंगों की पूजा करने के लिए पहुंचे, तो वह जुड़वा ज्योर्तिलिंग वहीं स्थापित हो गए। इन शिवलिंगों को महर्षि परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने काफी उठाने का प्रयास किया, लेकिन उस जगह से उठा नहीं पाए। हारकर दोनों पिता-पुत्र ने उसी जगह पर दोनों शिवलिंगों की पूजा अर्चना कर पूरे विधि-विधान से स्थापित कर दिया और तब से इस धार्मिक स्थल का नाम कैलाश पड़ गया। यह मंदिर भगवान शिव और पवित्र यमुना नदी जो कि मंदिर के किनारे से होकर गुजरती है के लिए प्रसिद्ध है। कभी-कभार जब यमुना का जल-स्तर बढ़ा हुआ होता है और यमुना में बाढ़ की स्थिति होती है तो यमुना का पवित्र जल कैलाश महादेव मंदिर के शिवलिंगों तक को छू जाता है। यह अत्यंत मनमोहक दृश्य होता है। इस बार यह मेला 17 अगस्त 2026 को लगाया जा रहा है। कैलाश मंदिर पर आने वाला हर व्यक्ति इस खूबसूरत ऐतिहासिक जगह की सराहना करे वगैरह नहीं रहता है। लेखक – डॉ. ब्रह्मानंद राजपूत (Brahmanand Rajput) On twitter @33908rajput On facebook – facebook.com/rajputbrahmanand E-Mail – [email protected] Mob/WhatsApp- 08864840607

वीर शहीदों

ऐ शहीदों देश पर जान निछावर करके सच्चे देश भक्त का परिचय दिया है तुमने, अपने लहू से सींचकर देश के तिरंगे को दुनिया में तिरंगे का पहचान कराया है तुमने। जिस तिरंगे से तुम लिपट कर आए हो इसकी आन-बान-शान को बढ़ाया है तुमने, गर्व है हमें बस इस बात का किसी के आगे … Read more

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