पत्रकारिता कोई फेसबुक नहीं है : ओम थानवी
वे जनतांत्रिकता की बातें करते हैं। फिर भी इस बात को समझ नहीं पाते (या समझना नहीं चाहते?) कि तमाम असहमतियों के बावजूद रवीन्द्रनाथ ठाकुर पर विष्णु खरे का लेख मैं जनसत्ता में कैसे दे देता हूँ, जिसमें अशोक वाजपेयी (जिनसे मेरे घनिष्ठ संबंध हैं) के खिलाफ भी कटु उक्तियाँ लिखी हों! ऐसे ही, वे … Read more