कठोर तप की पूर्णता के पचास वर्ष
आज के भौतिकवादी एवं सुविधावादी युग में जबकि हर व्यक्ति अधिक से अधिक सुख भोगने के प्रयत्न कर रहा है, ऐसे समय में एक जैनसंत जैन धर्म के कठोर तप – वर्षीतप का पचासवां वर्षीतप कर एक नया इतिहास बनाया है। अध्यात्म के क्षेत्र में तप का सर्वाधिक महत्त्व है। भारत के ख्यातनामा ऋषि-महर्षि-संतपुरुष आत्मसाक्षात्कार … Read more