श्री ‘‘श्रीजी‘‘ महाराज के निकुञ्ज वास पर विश्वभर के भक्तों में शोक की लहर

आप श्री का जन्म विक्रम सम्वत् 1986 को वैशाख शुक्ल प्रतिपदा (एकम) तदनुसार दिनांक 10 मई 1929 शुक्रवार को प्रात: 5 बजकर 45 मिनिट पर सलेमाबाद ग्राम के श्री रामनाथ जी इन्दौरिया (गौड़ ब्राह्मण) तथा श्रीमती सोनी बाई (स्वर्णलता) के घर पर हुआ। जन्म नक्षत्र के अनुसार आपका नाम ’’उत्तम चन्द’’ रखा गया। परन्तु एक … Read more

विदिशा क्षेत्र का एन्सायक्लोपेडिया है अषोक मानोरिया द्वारा रचित कृति ‘‘विदिषा’’

विदिशा क्षेत्रीय-प्रादेषिक वरिष्ठ पत्रकार श्री अषोक मानोरिया द्वारा रचित तथा हाल ही विमोचित ‘‘विदिषा’’ नामक कृति कमोवेष विदिषा का एन्सायक्लोपेडिया ग्रंथ है। पौराणिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक संदर्भ में विदिषा क्षेत्र के गर्वोन्नत अतीत, देष के राजे-महाराजों, शहंषाहों, अंग्रेजों के शासनकाल में विदिषा की शासन व्यवस्था, फिर स्वतंत्रता संग्राम में विदिषा की विषिष्ट भूमिका-महत्ता, स्वतंत्रता पष्चात विदिषा … Read more

दलितों में आज भी है मायावती की लोकप्रियता

(मायावती के 61वें जन्मदिवस 15 जनवरी 2017 पर विशेष) उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली में एक दलित परिवार में हुआ था। मायावती के पिता का नाम प्रभुदयाल और माता का नाम रामरती था। मायावती के छः भाई और दो बहनें हैं। इनका पैतृक गाँव बादलपुर है जो … Read more

घर-घर में उल्लास से मनायी जाती है मकर सक्रांति

सूर्य का मकर रेखा से उत्तरी कर्क रेखा की ओर जाना उत्तरायण तथा कर्क रेखा से दक्षिणी मकर रेखा की ओर जाना‘दक्षिणायन’है। उत्तरायण में दिन बड़े हो जाते हैं तथा रातें छोटी होने लगती हैं। दक्षिणायन में ठीक इसके विपरीत होता है। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन देवताओं की रात होती … Read more

मकर संक्राति मनाने के विभिन्न तरीके

पंजाब मे संक्रांति के एक दिन पूर्व में लोहड़ी मनाई जाती है। लोग घर-घर जाकर लकडिय़ां एकत्रित करते हैं और फिर लकडिय़ों के समूह को आग के हवाले कर मकई की खील, तिल व रवेडिय़ों को अग्न देव को अर्पित कर सबको प्रसाद के रूप में अर्पित करते हैं। इसे खिचड़ी पर्व भी कहा जाता … Read more

मानवतावादी प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानन्द

स्वामी विवेकानन्द ने अपने उन्तालीस वर्ष के अल्प जीवनकाल (12 जनवरी 1863से 4 जुलाई 1902) में जो काम किये उनकों हजारों साल तक दुनियाँ के हर वर्ग के इन्सान याद करते रहेंगे। स्वामीजी की अनूठी भाषण शैली तथा ज्ञान को देखते हुए शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन के बाद अमेरिकन मीडिया ने उन्हें साइक्लॉनिक हिन्दू … Read more

मानवतावादी प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानन्द —–Part 4

आज भी स्वामीजी का साहित्य किसी अग्निमन्त्र की भाँति पढ़नेवाले के मन में कुछ कर गुजरने का भाव संचारित करता है। किसी ने ठीक ही कहा है – यदि आप स्वामीजी की पुस्तक को लेटकर पढ़ोगे तो सहज ही उठकर बैठ जाओगे। बैठकर पढ़ोगे तो उठ खड़े हो जाओगे और जो खड़े होकर पढ़ेगा वो … Read more

मानवतावादी प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानन्द—-Part 3

विवेकानन्द ने पुरोहितवाद, ब्राह्मणवाद, धार्मिक कर्मकाण्ड और रूढ़ियों की खिल्ली भी उड़ायी और लगभग आक्रमणकारी भाषा में ऐसी विसंगतियों के खिलाफ युद्ध भी किया। स्वामीजी ने संकेत दिया था कि विदेशों में भौतिक समृद्धि तो है और उसकी भारत को जरूरत भी है लेकिन हमें याचक नहीं बनना चाहिये। हमारे देश के पास उससे ज्यादा … Read more

मानवतावादी प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानन्द—–Part 2

स्वामीजी के बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था उनके पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील । दुर्भाग्य से 1884 में विश्वनाथ दत्त की मृत्यु हो गई जिससे घर का सारा भार नरेन्द्र पर आ पड़ा। घर की आर्थिक अवस्था बहुत दयनीय हो गई थी। अत्यन्त दरिद्रता में भी नरेन्द्र बड़े अतिथि-सेवी थे। … Read more

मानवतावादी प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानन्द—PART 1

स्वामी विवेकानन्द ने अपने उन्तालीस वर्ष के अल्प जीवनकाल (12 जनवरी 1863से 4 जुलाई 1902) में जो काम किये उनकों हजारों साल तक दुनियाँ के हर वर्ग के इन्सान याद करते रहेंगे। स्वामीजी की अनूठी भाषण शैली तथा ज्ञान को देखते हुए शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन के बाद अमेरिकन मीडिया ने उन्हें साइक्लॉनिक हिन्दू … Read more

स्वामी विवेकानन्द के अनमोल बोल—भाग-2

आकांक्षा, अज्ञानता और असमानता ही बंधन की त्रिमूर्तियां हैं | जब लोग तुम्हे गाली दें तो तुम उन्हें आशीर्वाद दो। सोचो, तुम्हारे झूठे दंभ को बाहर निकालकर वो तुम्हारी कितनी मदद कर रहे हैं। खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है। भय ही पतन और पाप का मुख्य कारण है। अगर आप ईश्वर को … Read more

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