इतनी पोल है जिला परिषद में?

zila parishadअजमेर जिला परिषद का सरकारी तंत्र कैसा काम कर रहा है, इसकी पोल तब खुली, जब एक फर्जी पत्र के आधार पर झारखंड के जिला कोडरमा के गांव चंदवारा के विनोद प्रसाद गुप्ता द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन के नाम पर गांवों में तकरीबन दो हजार परिवारों के घरों के बाहर एल्यूमिनियम की प्लेटें लगा कर हर एक से तीस-तीस रुपए वसूल लेने का मामला उजागर हुआ।
दैनिक भास्कर ने इस चौंकाने वाले मामले के हर पहलु पर प्रकाश डाला है, जिससे साफ जाहिर होता है कि गारेखधंधा करने वाले ने बड़ी चतुराई से फर्जी पत्र जिला परिषद से जारी करवा लिया। अगर वह अपने स्तर पर ही ऐसा फर्जी पत्र बना कर लोगों को चूना लगाता तो समझ आ सकता था कि इसमें जिला परिषद का कोई दोष नहीं है, मगर उसने जिस तरह उस पत्र को बाकायदा स्वच्छता मिशन शाखा के रजिस्टर से ही डिस्पैच करवाया, वह साफ दर्शाता है कि इसमें जिला परिषद के ही किसी कर्मचारी की मिलीभगत है। अगर मिलीभगत नहीं है तो भी इतना तो तय है कि गोरखधंधा करने वाले ने परिषद में चल रही लापरवाही का फायदा उठाया है। आम तौर ये देखा गया है कि कोई पत्र एक सीट से दूसरी सीट तक पहुंचाने में कर्मचारी मुस्तैदी नहीं दिखाते, तो संबंधित व्यक्ति ही इस काम को अंजाम दे देता है। यह एक ढर्रा सा बन गया है। ऐसा प्रतीत होता कि आरोपी ने इसी पोल का फायदा उठाया है।
हालांकि अभी यह पता नहीं है कि उस फर्जी पत्र पर तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी निकया गोहाएन के हैं या नहीं, मगर संदेह तो होता ही है कि उस शातिर ने कहीं गुडफेथ का लाभ उठा कर तो हस्ताक्षर नहीं करवा लिए। जांच का एक बिंदु ये भी होगा कि कहीं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने आरोपी को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों से परे जा कर इस प्रकार के पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। कदाचित उनके हस्ताक्षर देख कर ही डिस्पैच करने वाले बाबू ने गुडफेथ में यकीन कर लिया हो कि पत्र मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से ही जारी हुआ है। इसका अर्थ ये है कि कारगुजारी करने वाले को पता था कि जिला परिषद में कितनी पोल है, तभी तो उसने उसका फायदा उठाते हुए बाकायदा पत्र डिस्पैच करवाया।
हालांकि अभी ये पता नहीं है कि एल्यूमिनियम प्लेट की लागत कितनी है और फर्जीवाड़ा करने वाले को कितना मुनाफा हो रहा था, मगर जिस प्रकार का श्रमसाध्य काम उसने हाथ में लिया, उससे इतना तो अनुमान होता ही है कि पत्र जारी करवाने के बाद वह बेखौफ हो कर यह काम अंजाम दे रहा था। इस से संदेह होता है कि कहीं पत्र पर हस्ताक्षर असली तो नहीं। हालांकि जांच होगी तो निश्चित रूप से तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुकर ही जाने वाले हैं। वैसे जिला कलेक्टर गौरव गोयल का कहना है कि विकास अधिकारियों को भेजे पत्र पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं सदस्य सचिव जिला स्वच्छता मिशन जिला परिषद के दस्तखत सही है या नहीं इसकी भी जांच करवाई जाएगी।
-तेजवानी गिरधर
7742067000

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