…अर्थात धर्मेन्द्र गहलोत के पुत्र चुनाव लड़ेंगे ही

हमने अजमेरनामा न्यूज पोर्टल के चौपाल कॉलम में चर्चा की थी कि अजमेर नगर निगम के निवर्तमान महापौर धर्मेन्द्र गहलोत के पुत्र रनित गहलोत के आगामी निगम चुनाव में पार्षद पद का चुनाव लडऩे की संभावना है। इस बारे में कुछ का कहना था कि गहलोत स्वयं तो चुनाव लडऩे की बात से इंकार कर रहे हैं। संयोग से शुक्रवार को स्वामी न्यूज चैनल के निगम चुनाव संबंधी फेसबुक लाइव में गहलोत से साक्षात्कार हो गया। मैंने जब इस जनचर्चा पर सवाल किया तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अभी तक इस तरह का कोई निर्णय नहीं किया है। कम से कम वे तो नहीं चाह रहे कि उनका पुत्र राजनीति में आए। अपनी ओर से उन्होंने ऐसी कोई मंशा भी जाहिर नहीं की है। लेकिन साथ ही जोड़ा कि यदि पार्टी ने चुनाव लड़वाने का निर्णय लिया तो वे इंकार भी नहीं करेंगे। इसका और खुलासा करते हुए उन्होंने यह भी जोड़ा कोई भी फैसला परिस्थिति पर निर्भर करता है। राजनीति में किसी भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते रहे कि वे अपने पुत्र को राजनीति में नहीं लाएंगे, मगर हालात ऐसे बने कि उन्हें जोधपुर लोकसभा चुनाव लड़वाना पड़ा और उसमें सफलता न मिलने पर किक्रेट बोर्ड का जिम्मा सौंपा गया। कुल जमा उनका कहना था कि वे नियति के फैसलों पर दखलंदाजी नहीं कर सकते।
उनके इस बयान से राजनीति के जानकार यह अंदाजा लगा रहे हैं कि गहलोत के पुत्र अवश्य चुनाव लड़ेंगे। दो बार महापौर रह चुके गहलोत के पुत्र के लिए एकाधिक सुरक्षित वार्ड मिल ही जाएंगे। ऐसे में पार्टी भला जिताऊ प्रत्याशी को चुनाव क्यों नहीं लड़वाना चाहेगी।
इसी से जुड़ी बात ये भी है कि अगर रनित गहलोत चुनाव लड़ कर जीतते हैं तो उप महापौर पद के लिए भी वे सशक्त दावेदार होंगे।
उल्लेखनीय है कि रनित गहलोत के वार्ड दो से चुनाव लडऩे की संभावना है। इस बारे में उनकी ही पार्टी के एक व्यक्ति ने निजी राय के बारे में मुझे बताया कि वे वार्ड दो से चुनाव क्यों लड़ेंगे, यह वार्ड कमाई वाला वार्ड तो है नहीं। वे जरूर ऐसे वार्ड लड़ेंगे, जहां कमर्शियल गतिविधियां होती हैं और अच्छी कमाई होती है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि ऐसी सोच गलत है। आम आदमी की ऐसी धारणा बन गई है कि उसे हर जगह भ्रष्टाचार ही नजर आता है, लेकिन कमाई वाले अथवा बिना कमाई वाले वार्ड को कोई मापदंड नहीं होता है।
समझा जा सकता है कि दो बार महापौर रह चुकने के बाद फिलहाल पांच साल तक तो उन्हें निगम की सक्रिय राजनीति से दूर रहना ही है। इसके अतिरिक्त बाद के विधानसभा या लोकसभा चुनाव में क्या होगा, कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसे में बेहतर ये है कि वे अपनी राजनीतिक विरासत सुनिश्चित करने के लिए पुत्र को राजनीति में लाएं।
खैर, रनित के वार्ड नंबर दो से चुनाव मैदान में आने की संभावना की वजह से भाजपा के अन्य दावेदार तनिक हतोत्साहित हैं। वार्ड दो की स्थिति ये है कि इसमें अनुसूचित जाति के काफी वोट हैं। पिछली बार भी यह वार्ड सामान्य था, फिर भी अनुसूचित जाति के वोट बैंक को देखते हुए कांग्रेस ने पूर्व पार्षद कमल बैरवा के भाई मनोज बैरवा को चुनाव लड़वाया और वे जीते भी। इस बार फिर वही स्थिति बनी है। स्वाभाविक रूप से इस बार भी कमल बैरवा के परिवार का दावा रहेगा। लोगों का मानना है कि यदि बैरवा के परिवार से किसी को टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय भी लड़ सकते हैं। ऐसा होने पर कांग्रेस के प्रत्याशी के लिए चुनाव जीतना मुश्किल हो जाएगा। एक तर्क ये भी है कि अगर बैरवा परिवार को कोई व्यक्ति निर्दलीय मैदान में उतरता है तो उसका नुकसान तो होगा, लेकिन एक फायदा ये भी हो सकता कि निर्दलीय मैदान में न उतरने पर बैरवा समाज के जो वोट अपने प्रयासों से भाजपा हासिल कर सकती है, उस पर अंकुश लग जाएगा, और सारे वोट एक मुश्त बैरवा प्रत्याशी को मिलेंगे, जिसका अप्रत्यक्ष लाभ कांग्रेस प्रत्याशी को मिलेगा।
जानकारी के अनुसार कांग्रेस में एकाधिक दावेदार हैं, मगर शैलेश गुप्ता व हेमंत जोधा के नाम अभी तक उभर कर आए हैं। शैलेश गुप्ता पुराने सुपरिचित कांग्रेसी नेता हैं, वहीं जोधा पर दिग्गज कांग्रेस नेता महेन्द्र सिंह रलावता का वरदहस्त माना जाता है। वे पिछले विधानसभा चुनाव में अजमेर उत्तर से हार गए थे। चूंकि हारे हुए प्रत्याशियों की राय को भी तवज्जो देने की पूरी संभावना है, इस कारण कुछ लोग मानते हैं कि अगर रलावता ने चाहा तो जोधा को टिकट मिल सकता है।

-तेजवानी गिरधर
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