-संभाग, जिले व नगर के हुक्मरान सरकार के सेवक हैं, जनता के नहीं
-सड़कें पगडंडी से भी बदतर हो गई हों, इनको क्या मतलब
-जनता केवल टैक्स देने और परेशानी भुगतने के लिए, सुविधा भोगने के लिए नहीं
-जिस जनता के टैक्स से तनख्वाह पाते हैं, वही अगर कुछ बोलेगी तो कानून का डंडा चला देंगे
-जनप्रतिनिधि ही जब लाचारी की भाषा में बात करेंगे तो हुक्मरान हावी होंगे ही
✍️प्रेम आनन्दकर, अजमेर।
👉खबरदार, अजमेर के हुक्मरानों को कोई कुछ नहीं कहेगा। यह जनता के नहीं, केवल सरकार के सेवक हैं। इन्हें जनता से कोई मतलब नहीं है। बात केवल सड़कों की ही कर लें। अजमेर शहर ही नहीं, पूरे जिलेभर में सड़कों की जो दशा है, वह जगजाहिर है, लेकिन मोटी चमड़ी के इन हुक्मरानों को इससे क्या मतलब है। कोई कुछ भी कहे, इनकी सेहत पर असर नहीं पड़ता है। कुछ दिन पहले हमारे एक साथी ने अपने ब्लॉग में लिखा था, “शहर के लोग बिना मतलब प्रशासन को कोसते हैं। प्रशासन का धन्यवाद अदा करना चाहिए कि कम से कम गड्ढों में सड़कों के कुछ अवशेष तो दिखाई दे रहे हैं।” हमारे एक और वरिष्ठ साथी ने कल सड़कों की दशा पर तेज धार वाला ब्लॉग लिखा है। मैं भी सड़कों की दशा पर अपनी कलम चलाने से खुद को रोक नहीं पाया हूं। इस ब्लॉग के मुख्य हैडिंग और सब हैडिंग में लिखी गई सारी बातें एकदम खरी-खरी हैं।
