*ऐसे बुना गया *जसवंत कंवर* को *महापौर बनाने का ताना-बाना*

*अब सब अपनी कालर ऊपर  कर कह रहे हम लाए*
सुशील चौहान

भीलवाड़ा। नगर निगम के जसवंत  कंवर के पहली महापौर बनने की कहानी कुछ यूं रची बुनी गई। जिसके पीछे राजपूत समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। साथ ही प्रशांत मेवाड़ा तो  अहम् है ही। इसमें विट्ठल दादा भी पर्दे के पीछे के निदेशक रहे है। लेकिन कुछ लोग अपने घर व कार्यालय में जसवंत कंवर और राजपूत समाज के लोगों के साथ खड़े  होकर फोटो खिंचवा कर खुद ही अपनी *पीठ थपथपा* रहें हैं।

यूं तो जसवंत कंवर के पति  भाजपा और संघ के काफी करीबी हैं। भूपेंद्र जी भाजपा के प्रवक्ता हैं। जिनकी विट्ठल दादा के तीनों बार के चुनाव महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अब आते हैं जसवंत कंवर को महापौर बनाने की कहानी के असली ताना-बाना बुनने वालों की ओर।तो पहले व्यक्ति तो वो है जिसकी खान एक  कम्पनी ने लीज पर ले रखी है।दूसरा व्यक्ति भीलवाड़ा पुलिस के अन्वेषण विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी हैं। जो राजपूत समाज में अहम् स्थान रखते हैं। जब इन दोनों व्यक्तियों के बारे में बगावत कर विधायक बनने  वाले को पता चला  कि यह दोनों तो उनके खेमें के ही हैं तो वो जसवंत कंवर के नाम  का विरोध नहीं कर पाएं।
अब जसवंत कंवर के महापौर बनने पर कोठारी साब और मेवाड़ के स्वयं  भूं मोदी  पूरे  शहर में अपनी कालर ऊपर कर शहर को बता रहे हमने ही जसवंत कंवर को महापौर बनाया हैं। यह सब श्रेय ले रहें हैं। वहीं यह लोग  * *हींग लेखें ना फिटकरी और रंग भी चोको आए कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं*
*सुशील चौहान*
* *स्वतंत्र पत्रकार*
 *पूर्व उप संपादक, राजस्थान पत्रिका, भीलवाड़ा*
 *वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रेस क्लब, भीलवाड़ा*
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