जिस पीढ़ी से लंबे समय तक किराए पर रहने की उम्मीद थी, वह अब 30 साल की उम्र से पहले ही घर खरीद रही है
कोटक महिंद्रा बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में लोग अब कम उम्र में ही अपना पहला घर खरीद रहे हैं, और होम लोन बाज़ार में जेनज़ी सबसे तेज़ी से उभरता वर्ग बन गया है।
बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 25 से 30 साल की उम्र वाले होम लोन ग्राहकों की संख्या में वित्त वर्ष 24 से वित्त वर्ष 26 के बीच 86% का इजाफा हुआ है, और यह संख्या 1,234 से बढ़कर 2,290 हो गई है। कोटक के व्यक्तिगत होम लोन ग्राहकों में जेनज़ी की हिस्सेदारी दो साल में 6% से बढ़कर 9% हो गई है, यानी इसमें 50% का उछाल आया है। इस तरह जेनज़ी बैंक के होम लोन पोर्टफोलियो में सबसे तेज़ी से आगे निकलता युवा वर्ग बन गया है। इसकी तुलना में, इसी अवधि में 30-45 साल की उम्र वाले होम लोन ग्राहकों की संख्या 26% बढ़ी है।
यह रुझान दिखाता है कि युवा भारतीयों का घर खरीदने को लेकर नजरिया बदल रहा है। जो मुकाम पहले की पीढ़ियां अक्सर जिंदगी में देर से हासिल करती थीं, अब उसे कहीं पहले पाया जा रहा है।
सालों से यह माना जाता रहा है कि जेनज़ी लंबे समय तक किराए पर रहना पसंद करेगी, बड़े वित्तीय फैसले टालेगी और लचीलेपन को ज्यादा तवज्जो देगी। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि जब बात घर खरीदने की आती है, तो कई युवा भारतीय उम्मीद से कहीं पहले बड़े और दीर्घकालिक फैसले ले रहे हैं।
कोटक महिंद्रा बैंक में होम लोन प्रमुख नकुल सक्सेना ने कहा, “भारतीय परिवारों में घर का मालिक होना आज भी एक खास जगह रखता है। जो चीज़ बदल रही है, वह है वह उम्र, जिसमें लोग यह फैसला ले रहे हैं। अब हम देख रहे हैं कि युवा ग्राहक पहले से कहीं ज्यादा स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ इस बाज़ार में उतर रहे हैं।”
कई परिवारों में युवा पेशेवर उस उम्र में घर खरीद रहे हैं, जिस उम्र में उनके माता-पिता अभी घर के लिए पैसे जोड़ रहे थे। कुछ मामलों में बच्चे अपनी कमाई से माता-पिता के घर के सपने को पूरा करने में मदद कर रहे हैं। वहीं कुछ परिवारों में दोनों पति-पत्नी की कमाई से वे फैसले जल्दी लिए जा रहे हैं, जिन्हें पहले की पीढ़ियां सालों तक टाल देती थीं।
महामारी ने भी घर को लेकर प्राथमिकताएं बदलने में एक अहम भूमिका निभाई है। लंबे समय तक घर में रहने के दौरान कई युवा परिवारों के लिए स्पेस, प्राइवेसी, प्राकृतिक रोशनी, निर्माण की गुणवत्ता और सामुदायिक जीवन की अहमियत बढ़ गई। घर अब सिर्फ रहने की जगह नहीं रहा; यह जीने, काम करने और भविष्य बनाने की जगह बन गया है।
यह बदलाव सोच में आए एक बड़े बदलाव को भी दिखाता है। हर चीज़ के अपनी जगह बैठने का इंतज़ार करने की बजाय, कई युवा खरीदार अपने सपनों पर पहले ही कदम बढ़ाना पसंद कर रहे हैं। पहले की पीढ़ियों के लिए घर खरीदना अक्सर करियर और आर्थिक तरक्की के कई सालों बाद आता था। आज कई युवा भारतीय घर को स्थिरता तक पहुंचने के रास्ते के तौर पर देखते हैं, न कि ऐसी चीज़ के तौर पर जिसका इंतज़ार पूरी स्थिरता आने तक करना पड़े।
साथ ही, बेहतर शिक्षा, करियर में जल्दी तरक्की और आमदनी में आया उछाल भी कई युवा भारतीयों को पिछली पीढ़ियों से पहले घर खरीदने के मुकाम तक पहुंचा रहे हैं।
श्री सक्सेना ने कहा, “हम जो देख रहे हैं वह ज्यादा भरोसे का नतीजा है। युवा खरीदार पूरी तरह से सेटल महसूस करने के लिए सालों इंतज़ार करने की बजाय, जिंदगी में जल्दी ही अपने सपनों पर आगे कदम रखने का हौसला दिखा रहे हैं। कोटक में हमें खुशी है कि हम इस सफर में उनका साथ दे रहे हैं और उनके इस भरोसे को अमल में बदलने में मदद कर रहे हैं।”
यह रुझान युवा खरीदारों के घर के बाज़ार में उतरने के तरीके को भी बदल रहा है। एक बड़ा ‘हमेशा के लिए घर’ खरीदने का इंतज़ार करने की बजाय, कई लोग अपने मौजूदा बजट और जीवन के इस पड़ाव के हिसाब से घर खरीद रहे हैं, और पहली खरीद को भविष्य की आर्थिक तरक्की की एक सीढ़ी के तौर पर देख रहे हैं।
कोटक के मुताबिक, युवा ग्राहकों में हुई यह बढ़ोतरी भारत के हाउसिंग बाज़ार में हो रहे एक बड़े बदलाव की तरफ इशारा करती है।
जेनज़ी के एक बड़े हिस्से के लिए यह उनके जीवन के पहले बड़े वित्तीय फैसलों में से एक बनता जा रहा है। घर का मालिक होना आज भी एक गहरी चाहत बनी हुई है, लेकिन युवा खरीदार इसे पिछली पीढ़ियों से अलग तरीके से हासिल कर रहे हैं। सही मौके का इंतज़ार करने की बजाय, कई लोग पहला कदम जल्दी उठाना चुन रहे हैं, ताकि घर के जरिए स्थिरता बना सकें, लंबी अवधि की संपत्ति खड़ी कर सकें और भरोसे के साथ आगे बढ़ सकें।
जिस पीढ़ी को अक्सर लचीलेपन और लगातार बदलाव से जोड़कर देखा जाता है, उसके लिए घर का मालिक होना अब स्थिरता की एक शुरुआती अभिव्यक्ति बनकर उभर रहा है, और यह पहले से भी जल्दी हो रहा है।