देवनानी के लिए मुसीबत बना अजमेर का टीटी कॉलेज

अजमेर,(एस.पी. मित्तल): स्कूली शिक्षा का विभाग छोडऩे से पहले कालीचरण सराफ अपने साथी मंत्री वासुदेव देवनानी को राजनैतिक झटका दे गए। सराफ के झटके को प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा गंभीरता से लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गत 26 अक्टूबर को जब मंत्रीमंडल का विस्तार किया तब शिक्षा विभाग दो भागों में विभाजित कर दिया। स्कूली शिक्षा का स्वतंत्र प्रभार अजमेर के विधायक वासुदेव देवनानी को दिया गया जबकि उच्च शिक्षा की जिम्मेदारी केबिनेट मंत्री कालीचरण सराफ के पास ही रखी गई। यानी सराफ के प्रभाव को कम किया गया। सराफ को भी इस बात का आभास हो गया था कि देवनानी को स्कूली शिक्षा का मंत्री बनाया जाएगा इसलिए सराफ जाते-जाते एक ऐसा आदेश निकाल गए जो अब देवनानी के लिए अपने ही शहर में मुसीबत बन गया है। सराफ ने कॉलेज शिक्षा निदेशालय के माध्यम से आदेश जारी करवाया था कि अजमेर में चल रहे टीटी कॉलेज को स्कूली शिक्षा से लेकर कॉलेज शिक्षा में शामिल किया जाए। इसी आदेश में टीटी कॉलेज में शैक्षिक कार्य कर रहे 15 शिक्षकों को निर्देश दिए गए कि वे अपने अजमेर स्थित जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) के कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराए। यानी स्कूल शिक्षा के मंत्री देवनानी के घर में ही 15 शिक्षकों को एक साथ एपीओ कर दिया गया। इसके साथ ही आदेश में कॉलेज शिक्षा के 16 शिक्षकों की नियुक्ति टीटी कॉलेज में कर दी। आदेश मिलने के साथ ही शुक्रवार को कॉलेज शिक्षा के 13 शिक्षकों ने टीटी कॉलेज में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा ली। अब टीटी कॉलेज के हालात हास्यास्पद हो गए है। एक और कॉलेज शिक्षा के 13 शिक्षकों ने पदभार ग्रहण कर लिया है तो वहीं स्कूली शिक्षा के 15 शिक्षक अभी तक भी रिलीव नहीं हुए है। मजे की बात यह है कि इन 15 शिक्षकों मेें पूर्व में देवनानी के निजी सहायक रहे अवधेश कुमार तिवारी भी शामिल है। स्कूली शिक्षा के ऐसे शिक्षक अब देवनानी की ओर देख रहे है। देवनानी के भी अभी यह समझ में नहीं आ रहा है कि किन परिस्थितियों में कालीचरण सराफ के विभाग से इस तरह के आदेश जारी किए गए। मुसीबत यह भी है कि कॉलेज शिक्षा के जिन शिक्षकों को टीटी कॉलेज में लगाया है वे भी अजमेर के ही निवासी है।
कांग्रेस सरकार के निर्णय की क्रियान्विति
स्कूली शिक्षा के विभाग से जाते-जाते कालीचरण सराफ ने गत कांग्रेस सरकार के निर्णय की क्रियान्विति की है। कांग्रेस सरकार ने ही निर्णय लिया था कि अजमेर और बीकानेर में चल रहे टीचर ट्रेनिंग कॉलेजों को कॉलेज शिक्षा में शामिल किया जाए। हालांकि इस निर्णय की क्रियान्विति कांग्रेस सरकार ने भी नहीं की और बाद में स्वयं सराफ ने भी 9 माह तक क्रियान्विति नहीं होने दी। लेकिन जब सराफ से स्कूली शिक्षा का विभाग छीना गया तो सराफ ने कांग्रेस सरकार के निर्णय की क्रियान्विति कर अपने साथी मंत्री देवनानी को राजनैतिक झटका दे दिया।
मामले को दिखवाएंगे : देवनानी
अजमेर के टीटी कॉलेज को लेकर हाल ही में जो कार्यवाही हुई है उसे गंभीरता के साथ दिखवाया जाएगा। यह कहना है स्कूली शिक्षा के मंत्री वासुदेव देवनानी का। देवनानी ने कहा कि सोमवार को वह जयपुर पहुंचेगे तब अधिकारियों से वार्ता कर मामले की जानकारी लेंगे। देवनानी ने स्वीकार किया कि उनके मंत्री बनने से पहले तक टीटी कॉलेज स्कूली शिक्षा के अधीन ही चल रहा था। उन्होंने कॉलेज में कार्यरत स्कूली शिक्षकों को भी भरोसा दिलाया कि उनके हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
शिक्षक संघ नाराज

स्कूली शिक्षा के 15 शिक्षकों को एक साथ एपीओ किए जाने पर विभिन्न शिक्षक संघों ने रोष प्रकट किया है। शिक्षक नेता रमेश आचार्य ने कहा कि यदि सरकार को टीटी कॉलेज को कॉलेज शिक्षा में ही शामिल करना था तो पहले स्कूली शिक्षा के शिक्षकों को अजमेर शहर में ही नियुक्ति दी जानी चाहिए थी। शिक्षक नेताओं ने इस मामले में स्कूली शिक्षा के मंत्री देवनानी से भी बात की है। देवनानी ने शिक्षक प्रतिनिधियों से कहा है कि वे कोई आंदोलन ना करे क्योंकि सरकार किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होने देगी। देवनानी ने शिक्षकों से भी कहा है कि वे पता लगाएंगे कि किन परिस्थितियों में टीटी कॉलेज के बारे में ताजा निर्णय हुआ है।