खतरे में इंटरने की आजादी

हेमेन्द्र सोनी
हेमेन्द्र सोनी

पिछले कुछ समय से इंटरनेट चलाते वक्त सर्फिंग करते हुए यह महसूस किया जा रहा था की कुछ वेब साइटें तो बहुत जल्दी खुल जाती हे और कुछ बहुत देर से खुलती हे । हम तो यही सोचते की नेट की स्पीड कम हे । लेकिन बात यह नहीं हे इसमें राज कुछ और हे । इसमे सबसे बड़ी बदमाशि आपके सर्विस प्रोवाइडर की हे । सर्विस प्रोवाडर आजकल पैसा कमाने के चक्कर में और आपकी जेब काटने के चक्कर में केवल उन्ही वेबसाइटो की स्पीड तेज रखते हे जो उन्हें पैसा देता हे और जो पैसा नही देता हे उनकी नेट स्पीड कम कर देता हे । कुछ प्रोवाइडर किसी ख़ास कंपनी की स्पीड उदाहरण के लिए जेसे फ्लिप कार्ट,फेशबुक, वाट्सअप, ट्वीटर, जेसी विशेष साइटो को अलग अलग प्रोवाइडर अलग अलग स्पीड सेट कर देते हे । जबकि कानून के अनुसार नेट की स्पीड सभी वेबसाइटो के लिए समान रूप से रहनी चाहिए । इससे इंटरनेट पे सर्फिंग की आजादी पे अंकुश लग रहा हे । सर्फिंग की आज़ादी में भेदभाव नहीं होना चाहिए। ये सर्विस प्रोवाइडरों की दादागिरी हे और इंटरनेट की आज़ादी पे हमला हे । इसके अलावा भी कुछ प्रोवाइडर नेट के बैलेंस से छेड़छाड़ करते हे और उसका खामियाजा उपभोक्ता को उठाना पड़ता हे बहुत कम डाउनलोडिंग और अपलोडिंग पर ही नेट बेलेंस उड़ जाता हे और उपभोक्ता मुंह ताकता रह जाता हे ।
इस पे ट्राई को अपना रवैया सख्त करना होगा । ट्राई को नेट न्यूट्रलिटि की अनदेखी नहीं करनी चाहिये ।
हेमेन्द्र सोनी ब्यावर

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