क्या इन्हें आदर्श बनना चाहिए देश के युवाओं का

ओम माथुर
पिछले महीने जब अभिनेत्री श्रीदेवी का निधन हुआ था।तो न्यूज चैनल चार दिन तक श्रीदेवी का बखान और गुणगान करते रहे। और अब 4 दिन अभिनेता सलमान खान को सजा और फिर बेल होने की खबरों के अलावा लगता है,देश मे कुछ नही है रहा है। श्रीदेवी शराब पीकर पानी के टब में गिरने के कारण डूबने से मरी थी।उन्होंने एक बसेबसाए परिवार को उजाडकर बोनी कपूर से दूसरी शादी की थी। उनके कई अभिनेताओं से अफेयर रहे थे। और सलमान खान कोई राष्ट्रहित के काम या युवाओं के किसी आंदोलन के कारण नहीं, बलिक काले हिरण के शिकार के कारण जेल गए थे । जिसे विश्नोई समाज अपने परिवार का सदस्य मानता हैं। जिस समाज की औरतें उन्हें अपना दूध पिलाती है। सलमान सडक किनारे सो रहे लोगों को कुचल चुके हैं। फिर भी उन्हें इतना सम्मान क्यों?
सवाल ये है कि क्या हमारी युवा पीढ़ी को ऐसे लोगों से प्रेरणा लेनी चाहिए। अगर नहीं ,तो क्यों इनका इतना महिमामंडन किया जाता है। क्यों समाज में,मीडिया मे इनकी इतनी चर्चा होती है।? अलवीरा अर्पिता का शेरा कौन है । यह आज कोई बच्चा भी बता सकता है कि सलमान की बहनें और बाडीगारड है। लेकिन संजीता चानू कौन है ,मीराबाई कौन है,दीपक लाठर कौन है,ये वो युवा भी नही जानते,जो श्रीदेवी और सलमान सहित बाकी फिल्मी हसि्तयों के दीवाने हैं। जो नाम मैनें ऊपर लिखे हैं ये अभी कामनवैल्थ मे मैडल जीत चुके है। लेकिन सलमान की जेल और बेल यात्रा के सोग और जश्न मे डूबा मीडिया इन्हें इसलिए फुटेज नही देता क्योंकि इससे उनकी टीआरपी नही बढती है। सलमान को घर तक छोडकर आने वाले चैनलों के रिर्पोटरो को ऐसे खिलाडियों के बारे मे बताने की फुर्सत नही है। जबकि इनकी मेहनत और सर्मपण देश के लिए होता है,खुद के लिए पैसा कमाने को लःनही। हमारे खिलाडी अभावों मे भी अपनी मेहनत से देश का नाम रोशन करते हैं,लेकिन फिर भी उन्हें क्या मिलता है। सरकार सुविधाएं नही देती और मीडिया उत्साह तक नही बढाता।
सलमान खान के मुरीद कहते हैं कि उनके भाईजान बहुत दिलवाले हैं। जरूरतमंदों की मदद करते हैं। लेकिन क्या इससे किसी के अपराध को भूल जाना चाहिए। क्या उसे सजा नहीं मिलनी चाहिए। हमारे देश की विडम्बना है कि यहां बालीवुड कलाकारों और क्रिकेटरों को ही युवाओं के आदर्श के रूप मे पेश किया जाता है। बाकी कुछ भी होना या करना मानो बेकार है।

ओम माथुर/9351415379

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