नुकसान तो भाजपा को ही होना है

ओम माथुर
गजेन्द्र सिंह शेखावत आज भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बन जाते हैं,तो मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे का राजनीतिक भविष्य अंधकारमय हो जाएगा और ये माना जाएगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह का भाजपा मे रूतबा पार्टी मे कायम है और कोई उन्हें चुनौती धहीं दे सकता।
लेकिन सवाल ये हे कि क्या चुनावी साल में भाजपा राजस्थान में वसुंधरा से पंगा मोल लेने का खतरा उठा सकती है? इसमें कोई शक नहीं की राजस्थान में वसुंधरा राजे का विकल्प भाजपा तैयार नहीं कर पाई और वसुंधरा ने राज करने के अपने सामंती तरीके के चलते किसी को उभरने भी नहीं दिया । मोदी और शाह के करीबी रहे ओम प्रकाश माथुर का नाम कई बार मुख्यमंत्री बनने के लिए उभरता रहा । लेकिन हमेशा यह सिर्फ नाम ही बनकर रह गया । प्रदेश अध्यक्ष भी वही रहा, जिसे वसुंधरा ने चाहा । ऐसे में चुनावी साल में अगर वसुंधरा की बात को पार्टी आलाकमान ने नहीं माना तो विधानसभा चुनाव में वह किसी भी हद तक जाने को तैयार रहेंगी। उनकी पसंद का अध्यक्ष नहीं बनने के कारण टिकट वितरण में भी विवाद होगा और संगठन और सत्ता अगर एक – दूसरे के उम्मीदवारों को निपटाने में लग गए,तो भाजपा के हाथ से राजस्थान खिसक सकता है ।
भाजपा आलाकमान इस बात को जानता है कि राजस्थान के लोग और खुद भाजपाई वसुंधरा की कार्यशैली से खासे नाराज हैं और 3 महीने पहले ही अलवर और अजमेर उपचुनाव में भाजपा को हराकर इसे जाहिर भी कर चुके हैं । तब यह नारा खूब चला था कि मोदी तुझ से बैर नहीं, लेकिन वसुंधरा तेरी खैर नहीं । कुल मिलाकर भाजपा इस वक्त ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां मोदी और शाह को पार्टी पर अपना दबदबा भी दिखाना है और राजस्थान को बचाए रखने का रास्ता भी निकालना है । लेकिन जिस तरह से वसुंधरा राजे,शेखावत की ताजपोशी के खिलाफ है ,उससे लगता नहीं कि आसानी से बात बन जाएगी। बीते 3 दिनों से वसुंधरा समर्थक जिस तरह दिल्ली में जाकर शेखावत का विरोध कर रहे हैं ,उसके बाद भी उन्हें अगर अध्यक्ष बनाया गया ,तो यह मानना पड़ेगा कि मोदी और शाह से कोई भी स्थानीय क्षत्रप टकरा नहीं सकता और ऐसे मे ये अघोषित बगावत वसुन्धरा राजे को भारी पड सकती है। लेकिन अध्यक्ष पद की ताजपोशी के इस विवाद ने भाजपा को विधानसभा चुनाव से पहले धड़ेबंदी का शिकार जरूर बना दिया है । शेखावत अध्यक्ष बने या ना बने,दोनों ही मामलों में घाटा भाजपा को ही होते हुए दिख रहा है ।जो कांग्रेस के लिए सुखद संकेत हो सकता है।

ओम माथुर/9351415379

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