दास्तानें पुलिस

राजेश टंडन एडवोकेट
*गैरों पे करम अपनों पे सितम ऐ जाने वफा ये जुल्म ना कर*
*ऐ री मैं तो प्रेम दिवानी मेरा दर्द*
*ना जाने कोय ?*
*पूरे दिन में कोर्ट की evidence.*
*शाम को crime review meeting.*
*पूरी रात patrolling.*
*फिर सुबह High Court.*
*शाम को पेशी with Case Files.*
*फिर picket checking.*
*फिर रात की 12 घंटे की emergency.*
*और सुबह Sessions Court में Bail Matter…..*
*Then……….Investigation, Investigation, Investigation !*
*Complete your 100 page Case* *File in one night.*
*Dispose off the daily 10 complaints you get for enquiry in 2 days.*
*Verify all tenants*
*Verify all servants*
*Verify all Cyber Cafe*
*Verify all Propery Dealers*
*Verify all Car Dealers*
*…..by evening.*

*Home ????*
*What’s that ???*

*Still Everybody’s angry !*
*Public,*
*Seniors,*
Judiciary
*Criminals &*
*Family…….all*

*फिर दुनिया कहती है, पुलिस इतनी थकी क्यों रहती है ??*
*Criminals से भिड़ते वक़्त alert क्यों नहीं होती ??*
*इस सबके बाद बडे अफसरों की मंथली की चिंता~!~*
*पुलिस अधिकारियों , राजनेताओं , पत्रकारों , न्यायिक अधिकारियों की समान सट्टे , शराब , टैक्सी , फिल्मों , वाटर पार्क , आदि की बेगारें ~!~*

*Please Welcome to our Hell !!*
*And You will know*
*What is police ?*

*यह एक हकीकत है जो पुलिस का छोटा अधिकारी याने थानेदार A S I स्तर के जो किसी को भी अपना दुख और हकीकत तक कह नहीं पाता है , अपना नाम ना बताने की शर्त पर मुझे अपनी व्यथा कथा बताई है , कि हम कैसा नरकीय जीवन जी रहे हैं और दुनिया समझ रही है कि हम मौज कर रहे हैं , हमसे तो क्ई गुना बेहतर हैं हमारे समकक्ष महिला पुलिस अधिकारी हैं , उन्हें ना तो कोई बेगारें बताता है ना वो किसी बडे अधिकारी को मंथली देती हैं*

*और बडे अधिकारी भी उनसे पैसे लेने में बेगारें बताने में डरते हैं , और जरा सी डांट पडते ही रोने लग जाती हैं और कमाती भी हमसे क्ई गुना ज्यादा ना थाने में हिस्सा देती हैं ना किसी की बेगारें करती हैं , इससे अच्छा होता हम कहीं मास्टर या बाबू बन जाते तो कम से कम चैन से तो जीते ………यहां तो पूरी नौकरी मेरे योग्य नहीं बडे अफसरों के योग्य सेवा में निकल जायेगी*

*राजेश टंडन वकील अजमेर*

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