
पांव इतने पसारिये जितनी लम्बी दोड यानि जिन्दगी ऐसी बनायें जहाँ खर्च खुद की कमाई से कम हो | उधार लेने से परहेज करें, अत्याधिक जरुरी या मजबूरी हो तभी कोई चीज उधार लें | जितना जल्दी हो उतनी जल्दी अपना कर्ज चूका दें | शत्रुता को भी अतिशीघ्र खत्म करें यानि कर्ज और शत्रु को कभी बडा मत होने दें |गलतियाँ या भूलें सभी से होती है, अपनी ही खुशी के खातिर खुद की भुल को निसंकोच स्वीकार करें | हर आदमी अपनी खुशीयों के सपने संजोता है, किसी भी व्यक्ति के सपनो की कभी भी मजाक नहीं बनाये एवं उनके सपनों कभी भी मत हंसिये | दूसरों के काम में व्यर्थ में टोकाटाकी नहीं करें वहीं अपने काम से मतलब रखें और अपने कार्य को तन्मयता एवं एग्राता से पूरा करें| सच्चाई तो यही है कि समय सबसे ज्यादा कीमती या अमूल्य है, इसलिए अपने समय को फालतु कामो मेँ नष्ट नहीं करें | कभी भी किसी की बुराई नहीं करें और नहीं किसी की बुराई सुनें क्योंकि वास्तविकता में बुराई नाव मेँ छेद के समान है, छेद (बुराई) छोटा हो बड़ा वो नाव को तो डुबोता ही है |कहावत है कि दूसरों की थाली में घी ज्यादा दिखाई देता है इसीलिये जो आपके पास है उसी मेँ खुश रहना सीखिये |
संकलनकर्ता—-डा. जे.के. गर्ग
सन्दर्भ—-मेरी डायरी के पन्नें, संतो के आशीर्वचन