रंगा रंग है हमारा देश

शिव शंकर गोयल
राजस्थान के राजसमंद जिले में चारभुजा नामक स्थान पर दशहरे के रोज रावण के पुतले का दहन नही होता है. देवस्थान विभाग द्वारा पत्थर से रावण का पुतला तैयार किया जाता है. जिसके पेट, सिर तथा हाथों पर मटकियां रखी जाती है. बाद में देवस्थान विभाग के सिपाही बन्दूकों से फायर कर नाभी तथा सिर की मटकियां फोडते है. राजस्थान के राजसमंद जिले में चारभुजा नामक स्थान पर दशहरे के रोज रावण के पुतले का दहन नही होता है. देवस्थान विभाग द्वारा पत्थर से रावण का पुतला तैयार किया जाता है. जिसके पेट, सिर तथा हाथों पर मटकियां रखी जाती है. बाद में देवस्थान विभाग के सिपाही बन्दूकों से फायर कर नाभी तथा सिर की मटकियां फोडते है. -हाडौती- राजस्थान- में रावण दहन छ: माही सैमेस्टर आधार पर होता है. रावण दहन के बाद वह छ: महीने में फिर खडा होजाता है. उसे चैत्र नव रात्रा की दशमी पर फिर जलाया जाता है. – राजस्थान- में रावण दहन छ: माही सैमेस्टर आधार पर होता है. रावण दहन के बाद वह छ: महीने में फिर खडा होजाता है. उसे चैत्र नव रात्रा की दशमी पर फिर जलाया जाता है. इंदौर से 55 किलोमीटर दूर एक ऐसा गांव भी है जहां आसपास के 86 गांवों के लोग इकट्ठा होकर दशहरा मनाते है. हरियाणा के मंडी आदमपुर में हिन्दू-मुस्लिम समाज के लोगमिलकर राम लीला का मंचन करते है. मुस्लिम समाज के पात्र नमाज के बाद राम लीला के संवाद बोलते है. इसी तरह बिहार में पटना से 200 किलोमीटर दूर कैमूर जिले के एक छोटे से गांव सातो अवंती में मंचित राम लीला हमारी गंगा जमुनी सांझी संस्कृति का प्रतीक है. 1- मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण दहन से पहले उससे क्षमा मांगी जाती है. जबकि 2- पास के गांव धमनार में दहन से पहले उसकी नाक तोडी जाती है. 3-मंदसौर वाले मंदोदरी का मायका अपने यहां मानते है. 4-वहां बसे नामदेव समाज के लोगरावण को अपना दामाद मानते है. 5- बैतूल जिले के मुलताई में होली के दूसरे रोज मेघनाथ की पूजा होती है. 6- दशहरे के दूसरे रोज उज्जैन के अंकपात क्षेत्र में रावण को पत्थर मारते है. 7- टीकम गढ में दशहरे के दिन रैकबार समाज में मछली देखने की परम्परा है. 8- विदिशा जिले के गांव रावण में उसकी पूजा होती है.

शिव शंकर गोयल
9873706333.

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