
कई लोग बचपन में स्कूल की सीखी हुई तिकडमें काम में ले रहे है. आपको याद होगा स्कूल में जब कभी हॉमवर्क करके नही लेजाते थे तब मास्साब के पूछने पर कह देते थे कि हॉमवर्क कर तो लिया है लेकिन घर भूल आया हूं वही तिकडम पुलीसवालें के सामने लोग कर रहे है. कहते है मास्क है तो सही लेकिन जल्दी 2 में घर रह गया. इसी तरह बचपन में फर्श पर कोयले से खाने बनाकर लंगडी टांग से सटापू खेलते हुए उन पर चलते थे अब Distancing के लिए बनाये खानों पर चलते है.
आपने अमोल पालेकर की फिल्म देखी होगी जिसमें वह और उसकी पत्नि रोज 2 के आपसी झगडों से ऊब कर आपस में अपना काम बदल लेते है मतलब अमोल घर का काम करना शुरू कर देता है और उसकी पत्नि ऑफिस जाने लगती है. उसका कुछ कुछ नजारा अब घरों में देखने में आरहा है. बेशक सब गृहणियां आफिस नही जारही है लेकिन सा’ब लोग तो झाडू, पौंछा, बर्तन आदि में जुट ही गए है.
जहां तक Work from home का प्रश्न है पहले सिर्फ अफसर ही ऐसा करते थे अब यह तरीका कर्मचारी भी अपनाने लगे है. इसके अपने फायदें है.
पहले के समय में लोग बकाया किराया मांगने वाले मकान मालिकों, कर्ज का तकाजा करने वालों से मुंह छुपाते थे अब हर कोई एक दूसरे से मुंह छुपा रहा है.
पहले लोग देवी देवताओं, मसलन मंदिदरो में हनुमानजी आदि की मूर्तियों को दूर से ही हाय ! कहते हुए हाथ जोडकर निकल जाते थे अब जान-पहचान वालों को देखकर निकलने लगे है.
पहले अस्पताल टैस्ट होने पर + ve रिपोर्ट को अच्छा मानते थे अब – ve को अच्छा मानते है.
आम जनता इंजीनियर, डाक्टर और सीए के मुकाबले किरयानेवाले,दवाईबेचने वाले और शराब की दुकान वालों पर ज्यादा विश्वास करने लगे है.
दिनों दिन बदतर होती अर्थ व्यवस्था की हालत में इधर सरकार कुछ बैंकों की संख्या कम कर रही है वही कोरोना काल में प्लाज्मा संकलन बैंक, पर्यटन डेटा बैंक, फूड बैंक आदि नामों से नए नए बैंक खुल रहे है.