
जीवन में कई बार ऐसा भी होता है कि जीवन भर हम जिन खुन के रिश्तो के प्रति समर्पित रहते है वे समय के साथ बदल जाते है और कुछ अनाम रिश्ते जीवन में ऐसे बन जाते है जो जीवन भर आपके साथ हमसफर बन जाते है। ऐसे में हमें हमेशा परिवर्तनो को स्वीकार करना सीख लेना चाहिए। कही बार ऐसा भी हो सकता है कि जिनसे कल घनिष्ठता थी आज संभव हैं वे पास रहकर दूर बहुत दूर हो गये हों। जीवन ऐसे ही चलता आया है। इसे सहज भाव से स्वीकार कर बिना कोई अपेक्षा किये आगे बढ़ जाना ही श्रेयस्कर है। जीवन में सहज रूप से जो स्वयंमेव मिल जाएं उन्हें जैसा है स्वीकार कर लेना ही चाहिए। यहा मेरा कहने का अभिप्राय मात्र इतना सा है कि जीवन में जो भी अच्छे मित्र मिले, उन्हें ताउम्र संभाल कर रखना चाहिए। उनसे अपेक्षा करने के स्थान पर उन्हें सम्मान देकर अपना बना लेना चाहिए। कभी समय मिले जो बचपन के उन मित्रों को भी तलाश लेना चाहिए जिनसे साथ अपने बाल्यकाल की स्मृतियां संजोई थी। उनकी स्मृतियां आपको वर्तमान समय में उत्साह से जीवंत कर देगी। उन अनाम रिश्तो को सहेजने संवारने की जिम्मेदारी आपकी स्वयं की है। स्वार्थ की संकीर्णता से बाहर निकलकर उनको भी संभालने का दायित्व आपको वर्तमान समय में निभाना होगा। क्या आप ऐसा कुछ करने के लिए तैयार हो सकेगे। आपके जबाब का इंतजार रहेगा।
DINESH K.GARG (OLD STUDENT OF ST PAUL’S,AJMER)
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