हंसते मुस्कराते जिये खुशहाल जिन्दगी part 3

क्यों हँसना जरुरी है?

j k garg
ऐसा लगता है कि आजकल की भाग दौड़—जल्दबाजी एवं तनावपूर्ण दिनचर्या की वजह से जीवन में लोग हँसना ही भूल गए हैं। आजकल अधिकतर लोगों के माथे पर सदेव भ्रकुटी तनी हुई रहती है और उनका चेहरा गंभीर वह ग़मगीन भी नज़र आता है। उनको देख कर ऐसा लगता है कि आजकल की भाग दौड़ और जल्दबाजी एवं तनावपूर्ण दिनचर्या की वजह से जीवन में लोग हँसना ही भूल गए हैं। ऐसा देखा जा रहा कि विशेष रूप से जो आदमी व्यावसायिक जीवन में जो जितना ज्यादा सफल होता है,वह उतना ही ज्यादा गंभीरता का मुखौटा ओढ़े रहता है। इसीलिए आजकल भारत जैसे विकासशील देश में भी हृदय रोग, मधुमेह वह उच्च रक्तचाप जैसी भयंकर बीमारियां पनपने लगती हैं। जिस प्रकार‘टॉनिक’से शरीर में स्फूर्ति आती है व रक्त संचार होता है उसी प्रकार हास्य से जीवन में स्फूर्ति आती है व रक्त-संचार होता है बेन जॉनसन के सही ही बताया था कि हास्य जीवन में‘टॉनिक का काम करता है ।,मुस्कुराने से विवाद और विषाद की कालिमा मिट जाती है और जीवन जीवन स्फूर्तिमय तथा आनंददायी हो उठता है। ठहाका लगाकर हँसना एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे न सिर्फ़ शरीर का प्रत्येक अंग आनंद विभोर होकर कंपन करने लगता है, बल्कि दिमाग भी कुछ देर के लिए सभी अवांछित विचारों से शून्य हो जाता है। इसलिए निर्विवाद से कहां जा सकता है कि हँसना वास्तव में अच्छा मैडिटेशन भी है। दोस्तों याद रक्खें, हंसने के लिए स्वाभाविक होना अति आवश्यक है, साथ ही जिंदगी के प्रति अपना रवैया बदलना भी जरूरी है। जीवन की छोटी छोटी बातों से,घटनाओं से,कुछ न कुछ हास्य निकल आता है,जिसे फ़ौरन पकड़ लेना चाहिए और उसे हँसी में तब्दील कर देना चाहिए। ऐसा करके न सिर्फ आप हंस सकते हैं बल्कि दूसरों को भी हंसा सकते हैं। याद रखिये जो लोग हँसते हैं,वो अपना तनाव तों हटाते ही हैं, लेकिन दूसरों को हंसा कर हैं वो दूसरों का तनाव भी दूर करते हैं। यानी सही मायने के अंदर हँसाना एक परोपकारी कार्य है। तो क्या आप यह यह पवित्र परोपकार को नही करना चाहेंगे? मनोवैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे कई मानसिक रोग हैं जिनका इलाज केवल हास्य द्वारा ही किया जा सकता है |

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