युग प्रवर्तक युवा सम्राट स्वामी विवेकानंद पार्ट 1

j k garg
स्वामी जी ने कहा कि जीवन में हमारे चारो ओर घटने वाली छोटी या बड़ी, सकारात्मक या नकारात्मक सभी घटनायें हमें अपनी असीम शक्ति को प्रकट करने का अवसर प्रदान करती है। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था “जिसके जीवन में ध्येय या संकल्प नहीं है तो ऐसा आदमी खेलती गाती, हँसती बोलती लाश ही है। ”जब तक व्यक्ति अपने जीवन के विशिष्ट ध्येय को नहीं पहचान लेता तब तक तो उसका जीवन व्यर्थ ही है। युवक और इन्सान को अपने जीवन में क्या करना है इसका निर्णय उन्हें ही खुद को ही करना चाहिये। ” रूढ़िवादी धर्मावलम्बी कहते है कि ईश्वर में विश्वास न करने वाला नास्तिक है किन्तु मै कहता हूँ कि जिस मनुष्य को अपने आप पर विश्वास नहीं है वो ही नास्तिक है” | स्वामी विवेकानन्द मानते थे कि ”अध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के ज्ञान के बिना विश्व अनाथ हो जायेगा”।

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