शिव शंकर गोयलवर्षों पूर्व, उस शहर में, आगरा गेट की फल-सब्जी मंडी के बाहर एक ठेलेवाला अक्सर ऊंची ऊंची आवाजें लगाकर आगरे के पेठें बेचा करता था. ना तो उस ठेलेवाले का और ना ही पेठों का आगरे से कही कोई नाता था लेकिन वह “आगरे का पेठा, बाप खायें या बेटा”. की आवाजें लगाकर पेठें बेचता था. हालांकि ठेलेवालें के बोलने के लहजे से यह नही लगता था कि गोया वह तमिलनाडू या उडीसा का है ताकि कोई करूणानिधी- स्टालिन अथवा बीजू पटनायक-नवीन पटनायक से उसका संबंध जोडले.
समय बीतने के साथ ही उस ठेलेवालें ने अपना जुमला बदल लिया और वह “आगरे का पेठा, मां खायें या बेटा” की आवाजें लगाकर पेठें बेचने लगा.
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला. वहां की भाजपा की सांसद डा. रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी को भाजपा ने टिकट देने में झिझक दिखाई तो कहा जाता है कि रीता बहुगुणा अपने बेटे के टिकट के लिए किसी भी कुर्बानी के लिए तैयार है.