सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी महान,
याद करता रहेगा आपको सदैव ही सारा जहान।
पौष-शुक्ला सप्तमी को हुआ था आपका जन्म,
सन्त और लेखक बनकर बनाई अमिट पहचान।।
प्रकाश पर्व के रूप में जन्मोत्सव मनाता है देश,
प्रेम एकता व भाईचारे का सदैव दिया है संदेश।
नही किसी से डरना और नही किसी को डराना,
ऐसी दी है ढ़ेर शिक्षाएं और दिए अनेंक उपदेश।।
कोई हुआ नही आप जैसा और नहीं कोई होगा,
जिंदगी में आपने वो देखा जो किस ने ना देखा।
आम इन्सान ऐसे रास्ते से भटक डगमगा जाता,
लेकिन आपके संग ऐसा कुछ भी नही हुआ था।।
परदादा गुरु अर्जुनदेव जी की शहादत से लेकर,
चारो पुत्रो की वीरता व शहीदो की मिसाल बनें।
कई घटनाएं घटित हुई फिर भी आप अडिग रहें,
महान सेनानी और खालसा पंथ संस्थापक बने।।
सभी सिखों के लिए पंच ककार अनिवार्य किये
केश, कंघा, कच्छा, कड़ा, कृपाण धारण किये।
चंडी दी वार जाप साहिब जफरनामा रचना रचें,
खालसा महिमा एवं बचित्र नाटक आप ही रचें।।
रचनाकार ✍️
गणपत लाल उदय, अजमेर राजस्थान
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