पौधों का तोहफा
आत्मीय तोहफें – पौधों के
मुरझाने नहीं देते यादों को ।
फल लगते हैं दुआओं के
टूटने नहीं देते वादों को ॥
परवरिश करों बच्चों सी
यह हुनर रंग लायेगा ।
नीति का है शाश्वत नियम
कुछ देने वाला बहुत पायेंगा ॥
ताप बड़ा तो तिलमिला उठे
बनावटी ठंड रखने वाले ।
सजा मिलेगी – उन्हें गरम
छीने जिसने कुदरती निवाले ॥
बचना चाहते हो अगर
उसकी आफत – मार से ।
लौटाओं हक ईमान उसका
जवाब दो प्यार का प्यार से ॥
बेटी को पढ़ाओं , लगाओं एक पौधा
पीढ़ियां करेगी – आप पर नाज ।
खिलेंगे फूल संस्कारों के
दिव्य जीवन बन जायेगा आज ॥
✍️ *राकेश* *आनन्दकर*