मनोकामनाएं सारी पूर्ण करती यह माता हिंगलाज,हज़ारों साल पुराना मंदिर जो गेहलपुर में है आज।
शांति एवं सुकून मिलता जहां ऐसा पवित्र ये स्थान,
प्राचीन कथानुसार प्रथम कुलदेवी चारण समाज।।
मूल स्थान का प्रतीक मंदिर है ब्लूचिस्तान में आज,
उसी का दुर्लभ जागृत रुप यह अजमेर राजस्थान।
अरांई क्षेत्र में पड़ता है ये जिसके खुल रहें ढ़ेर राज़,
केन्द्र बनकर कर रहा ये मानव जाति का उत्थान।।
प्राकृतिक सौन्दर्य से घिरा है नाग पहाड़ी पर स्थान,
कोसों दूर से दर्शन करने आते श्रृद्धालु इसी स्थान।
लगता है हर वर्ष यहां मेला होते रहते कई अनुष्ठान,
वर्षो की तपस्या पश्चात साधुबाबा का टूटा ध्यान।।
तुम्हारे चमत्कार को नमस्कार गेहलपुर वाली माता,
श्रृद्धालुओं का सिर जहां पर स्वतः ही झुक जाता।
है अलौकिक शक्ति तुम्हारी होते अनुष्ठान-जगराता,
गोरखजी को खेलता बच्चा मटके में मिल जाता।।
गेला रावल रखा साधुबाबा ने उस बालक का नाम,
आगे चलकर गेलेश्वर रावल से जाना गया ये धाम।
कठोर तपस्या के कारण मातारानी ने दिया वरदान,
निवास करूंगी एक पहर बनेंगे सारे बिगड़े काम।।
सैनिक की क़लम
गणपत लाल उदय, अजमेर राजस्थान