मोदी जी का पूंजीवाद का विश्लेषण

डा. जे.के.गर्ग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली आर्थिक नीतियों को अक्सर ‘मोदीनॉमिक्स’ (Modinomics) या एक विशेष प्रकार के ‘राज्य-निर्देशित पूंजीवाद’ (State-Driven Capitalism) के रूप में देखा जाता है।  

मोदी जी का पूंजीवाद के आर्थिक मॉडल का उद्देश्य बाजार सुधारों, निजी निवेश और मजबूत सरकारी नियंत्रण के समन्वय से आर्थिक विकास को गति देना है।अर्थशास्त्रियों और आलोचकों के बीच इस मॉडल के स्वरूप और इसके परिणामों को लेकर अर्थशास्त्रियों विभिन्न दृष्टिकोण हैं!
1. मोदी के पूंजीवाद का स्वरूप (Core Features) बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर भारी निवेश:–
 सरकार ने सड़कों, राजमार्गों, बंदरगाहों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Capex) को अभूतपूर्व बढ़ावा दिया है।निगमीकरण और कर सुधार: कॉरपोरेट टैक्स में ऐतिहासिक कटौती की गई और वस्तु एवं सेवा कर (GST) जैसे बड़े कर सुधार लागू किए गए ताकि व्यापार करना आसान (Ease of Doing Business) हो सके। 
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI Schemes): —
घरेलू विनिर्माण (Manufacturing) और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए चुनिंदा उद्योगों को वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया।
कल्याणकारी राज्य (Welfare State) और पूंजीवाद का मिश्रण: इस मॉडल की एक अनूठी विशेषता यह है कि जहां एक तरफ बड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया गया, वहीं दूसरी तरफ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और ‘JAM ट्रिनिटी’ (जनधन-आधार-मोबाइल) के जरिए करोड़ों गरीबों तक मुफ्त राशन, आवास और वित्तीय मदद पहुंचाई गई।
2. सकारात्मक परिणाम (The Supportive View)  ;–
 समर्थकों और सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, इस आर्थिक दृष्टिकोण के निम्नलिखित लाभ सामने आए हैं:तेज जीडीपी विकास दर: भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था हे !
बैंकिंग प्रणाली में सुधार:— ‘
 (IBC) के माध्यम से बैंकों के डूबे हुए कर्ज (NPA) में भारी कमी आई है।स्टार्टअप इकोसिस्टम: देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप्स के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार हुआ है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बना है।
 
3. नकारात्मक परिणाम और आलोचना (The Critical View) ;—-
  विपक्ष और कुछ स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों और अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंक द्वारा इस मॉडल की तीखी आलोचना भी की जाती है !
 
क्रोनी पूंजीवाद (Crony Capitalism) का आरोप: —
आलोचकों का तर्क है कि इस व्यवस्था में कुछ चुनिंदा बड़े औद्योगिक घरानों (जैसे अडानी और अंबानी) को ही बड़े सरकारी ठेके, हवाई अड्डे और प्राकृतिक संसाधन सौंपे गए हैं, जिससे बाजार में एकाधिकार (Monopoly) बढ़ रहा है। इसे अक्सर ‘अभिजात पूंजीवाद’ या ‘Billionaire Raj’ भी कहा जाता है।आर्थिक असमानता में वृद्धि: विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा शीर्ष 1% आबादी के पास सिमट गया है, जबकि मध्यम और निचले वर्ग की वास्तविक आय में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
रोजगार-विहीन विकास (Jobless Growth):—
 जीडीपी में वृद्धि के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र में पर्याप्त नौकरियां पैदा नहीं हो पाई हैं, जिससे युवाओं में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है।असंगठित और कृषि क्षेत्र पर दबाव: नोट बंदी और जीएसटी जैसे फैसलों ने देश के छोटे उद्योगों (M S M E s) और असंगठित क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया। इसके साथ ही कृषि संकट और ग्रामीण क्रय शक्ति में स्थिरता भी चिंता का विषय बनी हुई है।
मोदी सरकार का पूंजीवादी मॉडल “उच्च विकास और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण” को तो दर्शाता है, लेकिन इसके साथ ही “बढ़ती आर्थिक असमानता और बेरोजगारी के सीमित अवसरों” जैसी बड़ी रचनात्मक चुनौतियां भी इसके प्रमुख परिणाम बनकर उभरी हैं।
मोदी का भारत सत्तावादी-वर्चस्ववादी पूंजीवाद  सत्तावादी पूंजीवाद की एक ऐसी व्यवस्था है जो उच्च जीडीपी वृद्धि के साथ-साथ बढ़ती असमानता, भाई-भतीजावाद और सीमित गरीबी उन्मूलन को जन्म देती है।
मोदी सरकार का पूंजीपतियों की ओर झुकाव जारी, देश में बढ़ती जा रही आर्थिक विषमता. मोदी सरकार का विश्वास है कि पूंजीवादी विकास को जमीन पर उतारने से ही देश का विकास  मुमकिन है
भारतीय पूंजीवाद की कुंजी उसके व्यावसायिक क्षेत्र की लाभप्रदता है। 1970 के दशक में भारतीय पूंजी की लाभप्रदता में भारी गिरावट आई, जैसा कि वैश्विक स्तर पर भी हुआ।
सच है कि बाजार आधारित विकास को बढ़ावा देने से देश भर में उच्च आय वर्ग के लिए आर्थिक संभावनाएं और आय में वृद्धि संभव हुई, हालांकि विकास से प्राप्त लाभों का वित्त ऋण नहीं हुआ है  
डॉ जे के गर्ग 
पूर्व संयुक्त निदेशक  कालेज शिक्षा 

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!