नसीहत

छोड़ दे तू जानने को मेरी पहचान के बारे में,
तूने औकात तो दिखा दी मुझे बदनाम करके।
चाहे जितनी भी कर ले साजिश घर-घर जाकर,
मेरी ख़ामोशी को ही मेरी कमजोरी बना करके।
सारी ज़िन्दगी तू लगे रहना मुझे नीचा दिखाने में,
मेरी सब्र ही पहचान बनेगी तुझे बदनाम करके।
— श्री गोपाल नेवार ‘गणेश’
सलुवा, खड़गपुर, पश्चिम बंगाल

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