तेरी हँसी में सुबह मिले,
तेरी नज़र में शाम करूँ,
तू जो मिले तो ज़िंदगी को,
हर पल तेरे नाम करूँ।
आ जा ज़रा, मेरे करीब आ,
कुछ अनकही सी बात करूँ,
तू मेरी धड़कनों में रहे,
मैं तुझसे ही शुरुआत करूँ।
चुपके से जब हवा चले,
तेरा ही एहसास आए,
भीगी हुई इन पलकों पर,
तेरा ही ख़्वाब मुस्काए।
राहों में तेरी आहट हो,
साँसों में तेरा सुर रहे,
मैं जिस तरफ़ भी देखूँ सनम,
चेहरा तेरा नज़र रहे।
तू सामने, मैं रूबरू,
लम्हों को यूँ आबाद करूँ,
तेरी हँसी में सुबह मिले,
तेरी नज़र में शाम करूँ।
तेरी हँसी में सुबह मिले,
तेरी नज़र में शाम करूँ,
तू जो मिले तो ज़िंदगी को,
हर पल तेरे नाम करूँ।
तारों से कुछ माँगा नहीं,
चाँद से कोई आस नहीं,
तेरा मेरा साथ रहे,
इससे बड़ी सौगात नहीं।
तेरी हथेली थामकर,
कुछ दूर तक हम साथ चलें,
दुनिया भले ही रुक जाए,
हम प्यार की बातें कर लें।
तेरे बिना ये रास्ते,
लगते हैं कुछ वीरान से,
तू साथ हो तो खिल उठें,
पतझड़ के भी अरमान से।
तेरी हँसी में सुबह मिले,
तेरी नज़र में शाम करूँ,
तू जो मिले तो ज़िंदगी को,
हर पल तेरे नाम करूँ।
कल की ख़बर किसको यहाँ,
कल का भरोसा क्या करें,
जो पल मिला है प्यार का,
उसको ही अपना घर करें।
तेरी वफ़ा की छाँव में,
मैं उम्र सारी काट दूँ,
तू एक बार कह दे अगर,
ख़ुद को तुझ पर वार दूँ।
ना कोई वादा आसमाँ का,
ना चाँद तारे माँगता हूँ,
बस तेरे दिल में एक जगह,
उम्र भर की माँगता हूँ।
तेरी हँसी में सुबह मिले,
तेरी नज़र में शाम करूँ,
तू जो मिले तो ज़िंदगी को,
हर पल तेरे नाम करूँ।
आ जा ज़रा, मेरे करीब आ,
कुछ अनकही सी बात करूँ,
तू मेरी धड़कनों में रहे,
मैं तुझसे ही शुरुआत करूँ।
तू सामने रहे बस यूँ ही,
मैं हर दुआ तेरे नाम करूँ।
“राहत टीकमगढ़”