पाकिस्तान में ‘नफरत की पाठशाला’

पाकिस्तान के स्कूलों में किताबों के जरिये बच्चों के कोमल मन में हिंदू, सिख और ईसाइयों के प्रति नफरत और समाज में धार्मिक कट्टरपंथ के बीज बोए जा रहे हैं. मानवाधिकार संगठनों और शिक्षाविदों के तमाम प्रयासों के बावजूद समाज में नफरत पैदा करने वाली सामग्री कम होने के बजाय और बढ़ रही है.

राष्ट्रीय न्याय की पाठ्य सामग्री विश्लेषण की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में समय के साथ पाठ्य पुस्तकों में नफरत फैलाने वाली सामग्री कई गुना बढ़ गई है. आयोग ने पंजाब और सिंध प्रांत के स्कूलों की किताबों का विश्लेषण करके पाया कि जिन किताबों में पहले इस तरह के अध्याय नहीं थे अब उनमें भी इस तरह की सामग्री भर दी गई है.

आयोग की ‘शिक्षा या नफरत’ को हवा शीर्षक की रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब के स्कूलों की 2009-11 में प्रकाशित किताबों में पहले नफरत पैदा करने वाली 54 लाइनें थीं, लेकिन 2012 में ऐसी लाइनें बढ़कर 122 हो गई हैं.

रिपोर्ट के अनुसार 2009 में प्रकाशित कक्षा 9 और 10 की उर्दू व्याकरण की और कक्षा 6 और 8 की सामाजिक विज्ञान की किताबों में इस तरह की कोई सामग्री नहीं थी लेकिन अब इन पुस्तकों में भी ऐसे अध्याय शामिल हो गए हैं.

शिक्षाविद ए. एच. नैय्यर ने पाकिस्तान में शिक्षा को आधार बनाकर किए जा रहे इस सरीखे हमलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उदारवाद और धर्मनिरपेक्षता विरोधी ताकतें क्रमबद्ध तरीके से पाकिस्तान के अंदर काम कर रही हैं. हमने अपने देश की शिक्षा नीति को तैयार करने में गहन परिश्रम करके 1997 में एक के बाद एक सात मसौदे पेश किए, फिर पता नहीं किसने एक आठवां मसौदा पेश कर दिया, जिसमें इस्लामी शिक्षा को विकसित करने की अनुशंसा की गई थी.

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