कादरी व पाक सरकार में समझौता, आंदोलन खत्म

धार्मिक गुरु ताहिर उल कादरी के सामने आखिरकार पाकिस्तान सरकार ने घुटने टेक दिए। सरकार के दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ पांच घंटे चली बैठक में समझौते के बाद कादरी ने चार दिन से चला आ रहा अपना आंदोलन गुरुवार रात खत्म कर दिया। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ ने भी समझौते को मंजूरी दे दी है। 1999 में सैन्य तख्तापलट का समर्थन करने वाले मिन्हाज-अल-कुरान के प्रमुख कादरी ने सरकार को चेतावनी दी थी कि आज हमारे प्रदर्शन का आखिरी दिन है। वह शुक्रवार को नई रणनीति के तहत आगे बढ़ेंगे। इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने वार्ता के निर्देश दिए थे।

समझौते के बाद कादरी ने अपने समर्थकों को बताया कि बातचीत में ‘इस्लामाबाद लांग मार्च घोषणा पत्र’ को अंतिम रूप दे दिया गया है। कादरी ने बातचीत के लिए शर्त रखी थी कि गृह मंत्री रहमान मलिक बातचीत करने वाली समिति में शामिल न हों। बातचीत कादरी के बुलेटप्रूफ सुरक्षा घेरे में हुई। वार्ता शुरू होने से कादरी ने अपने समर्थकों से कहा था कि लिखित समझौता हाथ में आने तक वे धरनास्थल न छोड़ें।

समझौते के अनुसार 16 मार्च से पहले संसद भंग करनी होगी, ताकि 90 दिन के भीतर चुनाव कराए जा सकें। इसके अलावा सरकार के प्रतिनिधि पाकिस्तानी अवामी तहरीक (पीएटी) के साथ मिलकर कार्यवाहक सरकार के प्रधानमंत्री के लिए दो ऐसे नाम सुझाएगी जो ईमानदार होने के साथ ही किसी के साथ पक्षपात न करे। चुनाव आयोग के गठन पर 27 जनवरी को होने वाली बैठक में चर्चा की जाएगी। चुनाव सुधारों पर भी आम चुनाव से पहले फैसला करना होगा। समझौते में आंदोलन में शामिल लोगों पर मुकदमें तत्काल प्रभाव से वापस लेने की बात भी शामिल है।

गौरतलब है कि संसद भंग करने की मांग के साथ कादरी पिछले चार दिन से संसद के पास अपने हजारों समर्थकों के साथ धरने पर बैठे थे।

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