नई दिल्ली। भारत के लिए चीन हर मौके पर चुनौती खड़ा करता रहता है। चीनी सेना और भारतीय सेना के बीच में उत्तरी लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में जारी तनाव आज छठे दिन भी बरकरार है। भारतीय सेना की ओर से इस तनाव को कम करने के लिए प्रयास जारी हैं। इस मामले पर रक्षामंत्री एके एंटनी ने कहा कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा। चीनी सैनिकों के टेंट से कुछ ही दूरी पर भारतीय सैनिकों ने भी डेरा जमा लिया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि चीन के इस कदम पर अभी तक सरकार ने कोई कठोर कदम क्यों नहीं उठाया है? चीन हमारे सीमा क्षेत्र में 10 किलोमीटर अंदर घुसपैठ कर चुका है लेकिन सरकार हो चाहे विपक्ष इस पर खास तवज्जो नहीं दे रहा है।
अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय राज्यमंत्री निनांग इरिंग ने भारतीय क्षेत्र में चीन के घुसपैठ को अति दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए रविवार को कहा कि चीन की सेना का रवैया बहुत अनुचित है। इरिंग ने एक बयान में कहा, लद्दाख या अरुणाचल प्रदेश जैसे चीन के सीमाई क्षेत्र का होने के कारण हम चीन सरकार से अर्ज करेंगे कि उसकी सेना का यह रवैया बहुत अशोभनीय है। खबरों के मुताबिक चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के करीब 50 सैनिक पूर्वी लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) क्षेत्र में घुस आए हैं और वहां तंबू लगाकर एक अस्थाई चौकी बना लिए हैं।
इस तरह चीन की सेना ने भारतीय सेना का मुकाबला करने के लिए एक मंच तैयार कर लिया है। इरिंग ने कहा कि हम वास्तव में चाहते हैं कि चीन और भारत, जनता और देश के विकास के लिए मिलकर काम करें और दोनों बहुत मजबूत शक्तियां बनें, जिससे वास्तव में पूरी दुनिया डरेगी। अरुणाचल प्रदेश से कांग्रेस के सांसद इरिंग ने कहा कि यह झगड़ालू मुद्दा उनके अपने राज्य में भी है। यह आज की कहानी नहीं है बल्कि 1962 में चीन के हमले या कहें तो 1947 से भी पहले की है।