कितने दिन लो प्रोफाइल रह पाएंगे गालरिया?

जिला कलेक्टर वैभव गालरिया की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि उन्हें लो प्रोफाइल माना जाता है। घमंड उनमें रत्ति मात्र का भी नहीं है। वे दफ्तर में बैठ कर हुकुम चलाने की बजाय जमीनी हकीकत जानने के लिए खुद जनता के बीच चले जाते हैं। यदि वजह है कि वे गुरुवार को अतिवृष्टि ग्रस्त केकड़ी गए और बहते पानी में पैदल चल कर वास्तविक हालात खुद अपनी आंखों से देखे। लोगों को हो रही परेशानी को खुद ने महसूस किया। उनके इस स्टाइल की खूब तारीफ हो रही है।
मगर कानाफूसी है कि वे इस तरह कब तक लो प्रोफाइल रह पाएंगे? इससे पहले भी पूर्व जिला कलेक्टर श्रीमती मंजू राजपाल ने आम जनता से सीधे जुडऩे के लिए खुद झाड़ू हाथ में लेकर सफाई अभियान का श्रीगणेश किया, मगर यहां की राजनीति से आजिज आ कर अपने चैम्बर में कैद हो कर रह गईं। बाद में तो हालत हो गई कि सीधे मुंह किसी नेता से बात तक नहीं करती थीं। कोई भी कितना भी बड़ा तुर्रम खां क्यों न हो, वे घास नहीं डालती थीं। नतीजतन उन पर हेकड़बाज का तमगा लग गया। देखना है कि मौजूदा कलेक्टर गालरिया किस प्रकार यहां की दो धारी राजनीति से गुजर कर अपने आपको कितने दिन तक लो प्रोफाइल रख पाते हैं।

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