नक्कारखाने में तूती : केजरीवाल की आवाज

एक समय था जब टीम अन्ना के वास्तविक सेनापति अरविंद केजरीवाल ने सरकार की नाक में दम कर रखा था। उनकी हर बात को, हर शब्द को गौर से सुना जाता था। इलैक्ट्रॉनिक मीडिया वालों का भी केजरीवाल का चेहरा दिनभर दिखाए बिना खाना हजम नहीं होता था। मगर कानाफूसी है कि आज बदले हालात में उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज बन कर रह गई है। वे खुल कर कह रहे हैं कि कोयला घोटाले में अगर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दोषी हैं तो उतने ही दोषी तत्कालीन भाजपाई मुख्यमंत्री भी। उन्हीं मुख्यमंत्रियों के दबाव की वजह से केन्द्र को नीलामी की बजाय सीधे आवंटन करना पड़ा। आज जब कि कांग्रेस अब तक के सबसे गंभीर संकट में है और भाजपा उसे कच्चा चबा जाना चाहती है, केजरीवाल का बयान दोनों की पोल खोल रहा है। वे दोनों पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगा रहे हैं। मगर अफसोस उनके इस बयान को न तो मीडिया वाले ठीक से उठा रहे हैं और न ही कांग्रेस व भाजपा के नेता कोई प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। कोई कॉग्लिजेंस ले ही नहीं रहा। शायद ऐसी ही स्थिति के लिए यह कहावत बनी है-नक्कारखाने में तूती की आवाज।

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