दिल्ली में सरकार बनाने से पहले भाजपा को छवि की चिंता

amit_shahनई दिल्ली : दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर भाजपा में मंथन तेज हो गया है। भावी रणनीति तय करने के लिए पार्टी ने सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, दिल्ली के प्रभारी प्रभात झा व प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय की एक टीम बनाई है। यह टीम उप राज्यपाल की तरफ से सरकार बनाने का न्योता मिलने पर सरकार बनाने की संभावनाएं तलाशेगी। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार बनाने के लिए हो रही तोड़ फोड़ संबंधी खबरों पर चिंता जताते हुए पार्टी को सचेत रहने को कहा है। मंगलवार रात भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के दौरान अनौपचारिक बातचीत में दिल्ली की स्थिति पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में जोड़ तोड़ में भाजपा नेताओं का नाम आने पर नाराजगी जताई और पार्टी नेताओं से कहा भी इससे पार्टी की छवि खराब हो रही है, जो ठीक नहीं है। सरकार बनाने का न्योता मिलने पर भी इस तरह की छवि नहीं बननी चाहिए।

गौरतलब है कि मोदी व पार्टी के कुछ बड़े नेता दिल्ली की मौजूदा स्थिति में नए चुनाव को ज्यादा बेहतर विकल्प मानते रहें हैं। हालांकि नितिन गडकरी समेत प्रदेश के नेता सरकार बनाने की कोशिश के पक्ष में रहे हैं।

पितृ पक्ष के बाद होगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में चार सप्ताह में 10 अक्टूबर तक फैसला लेने को कहा है। दूसरी तरफ पितृपक्ष शुरू होने से अगले 15 दिन तक इस बारे में मामला ज्यादा गरमाने की उम्मीद नहीं है। उप राज्यपाल अगर सबसे बड़े दल के नाते भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता देते हैं, तो भाजपा सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है। लेकिन वह सदन में बहुमत साबित होने से पहले किसी भी दल से जोड़ तोड़ कर समर्थन नहीं लेगी। उसकी शुरुआती कोशिश अल्पमत सरकार की होगी। भले ही बाद में किसी दल में टूट हो कर भाजपा को समर्थन मिल जाए।

अब न्योता नकारना होगा मुश्किल

विधायकों के चुनाव के पक्ष में न होने से भाजपा के एक वर्ग को भरोसा है कि एक बार सरकार बनने पर उसके पक्ष में बहुमत बनने में ज्यादा समस्या नहीं आएगी। हालांकि प्रधानमंत्री की कड़ी नसीहत के बाद पार्टी अब किसी भी दल के विधायकों से संपर्क नहीं करेगी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि हम लोगों ने ही इतना ज्यादा माहौल बना दिया है कि अब सरकार बनने का न्यौता मिलने पर उससे इंकार होना संभव नहीं होगा। पार्टी जोड़-तोड़ के बजाए जब तक भी चले अल्पमत सरकार को बेहतर विकल्प मानती है। इस दौरान उसकी मंशा दिल्ली के लिए बड़ी घोषणाएं करने की है, ताकि नए चुनाव की स्थिति में उसे लाभ मिल सके।
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