प्रमुख ब्रिक्स देशों से हेल्थकेयर उद्यमियों ने महिला उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए एक दूसरे से जोड़ने वाली व्यवस्था सुगम बनाने की प्रौद्योगिकी की वकालत की

नयी दिल्ली, 17 दिसंबर, 2021- भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसे अग्रणी ब्रिक्स देशों के वैश्विक हेल्थकेयर उद्यमियों ने इस क्षेत्र में महिला उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी सुगमता और एक दूसरे से जोड़ने वाली व्यवस्था की जरूरत बताई है। पैनल में शामिल लोग ब्रिक्स सीसीआई वुमेन्स वर्टिकल (ब्रिक्स सीसीआई डब्ल्यूई) द्वारा ष्स्वास्थ्य क्षेत्र में महिला उद्यमियों के लिए चुनौतियां और अवसरष् विषय पर आयोजित संवादात्मक परिचर्चा में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।

इस पैनल में दक्षिण अफ्रीका की सनशाइन मेडिकल एस्थेटिक्स एंड वेलनेस क्लिनिक की निदेशक एवं सीईओ डॉक्टर सनशाइन नेका म्बेवाना, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ और सामाजिक उद्यमी डॉक्टर स्वाति माहेश्वरी, रेजोव क्लिनिक की संस्थापक और ऑर्थोडोंटिस्ट, कॉस्मोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रियंका गोयत और जय साई राम हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक पद्मा पंडिता मुकू शामिल थीं। इस सत्र का संचालन ब्रिक्स सीसीआई वी की संयोजक और शीएटवर्क की संस्थापक रूबी सिन्हा ने किया। ब्रिक्स सीसीआई की निदेशक (बिजनेस एडवाइजरी) शर्मिष्ठा घोष ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने इससे पूर्व 12वीं ब्रिक्स लीडर्स समिट में ब्रिक्स देशों के बीच पारंपरिक दवाओं और डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में सहयोग की जरूरत बताई थी।

अपने उद्घाटन भाषण में ब्रिक्स सीसीआई की संचालक मंडल की सदस्य और वर्टिकल हेड, ब्रिक्स सीसीआई डब्ल्यूई शबाना नसीम ने कहा, कोविड महामारी के साये में होने के बावजूद हेल्थकेयर क्षेत्र ने असाधारण लचीलापन और मजबूती दिखाई है। भारत में ऑटोमेशन और हेल्थकेयर के बीच बढ़ते तालमेल के साथ यह क्षेत्र आने वाले समय में नए कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी में है जिसमें महिला उद्यमी पूरे ब्रिक्स देशों में इस वृद्धि के केंद्र में होंगी।

सनशाइन मेडिकल एस्थेटिक्स (दक्षिण अफ्रीका) की निदेशक डॉक्टर सनशाइन नेका म्बेवाना ने कहा, हमारे पास मौजूद प्रौद्योगिकी का कुशल उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि हेल्थकेयर क्षेत्र में किसी भी महिला उद्यमी की प्रगति हो।

इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ और सामाजिक उद्यमी डॉक्टर स्वाति माहेश्वरी ने कहा, डिजिटल हेल्थकेयर क्रांति के बारे में सबसे बड़ी चीज यह है कि यह मीलों दूर मरीजों पर नजर रख सकता है और उन्हें आपातकालीन दवाएं और इलाज उपलब्ध करा सकता है। लोगों ने टेली कंसल्टेशन में एक निश्चित स्तर तक भरोसा दिखाया है और डॉक्टरों तक आसानी से पहुंचने में मदद की है।

ऑर्थोडोंटिस्ट, कॉस्मेटोलॉजिस्ट एवं रेजोव क्लिनिक्स की संस्थापक डॉक्टर प्रियंका गोयत ने कहा, यहाँ भारत में दंत चिकित्सा तक लोगों की पहुंच बहुत ही कम रही है, लेकिन प्रौद्योगिकी और दंत चिकित्सा विज्ञान के विलय के साथ हम हमारे मरीजों को अधिक समग्र और विश्वसनीय इलाज और वह भी एआई, एमएल जैसी प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर उनके घर पर इलाज उपलब्ध कराने में समर्थ रहे हैं। इन प्रौद्योगिकियों का उपयोग इलाज के बाद के परिणामों का अनुमान लगाने में किया जा रहा है।

जय साई राम हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक पद्मा पंडिता मुकू ने कहा, टेली हेल्थ ने इस महामारी के दौरान निश्चित तौर पर एक अहम भूमिका अदा की है खास तौर पर उस दौर में जब बेड्स और ऑक्सीजन की भारी किल्लत थी। इस दौरान, हमारे पास समय के स्लॉट होते थे जिसमें हम खुद को क्वरंटीन रखने वाले मरीजों को दूर से ही परामर्श उपलब्ध कराते और उनका इलाज करते थे।

उन्नत एआई, टेलीमेडिसिन, 3डी प्रिंटिंग आदि के आगमन के साथ हेल्थकेयर के बाजार की उपस्थिति और मजबूत होने की संभावना है। इसलिए, इस पूरे हेल्थकेयर क्षेत्र में महिला उद्यमियों को विकास के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आरबीएसए एडवाइजर्स द्वारा हेल्थकेयर क्षेत्र में संभावनाओं के दोहन को लेकर हाल ही में जारी उद्योग अनुमानों के आधार पर भारत का हेल्थकेयर पारितंत्र वर्ष 2033 तक 50 अरब डॉलर का होने जा रहा है और यह 2020 और 2023 के बीच यह साल दर साल 39 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, भारत में टेलीहेल्थ का बाजार सालाना 39.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा और वर्ष 2025 तक इसके 10.6 अरब डॉलर पर पहुंचने की संभावना है।

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