भूतपूर्व ईएफआर जवानों की सरकार से गुहार

बटालियन में शीघ्र भर्ती लेकर करो उपकार….
   विगत लगभग दो दशकों से भर्ती न लेने की वजह से ईएफआर बटालियन इतिहास बनने की कगार पर…
  ( सलुवा से श्याम कुमार राई “सलुवावाला”)
ई.एफ.आर बटालियन मे भर्ती लेने की प्रक्रिया शुरू करने हेतु
राज्य की स्पेशल फोर्स मानी जाने वाली बटालियन में जवानों की नियुक्ति हेतु नई सरकार अवश्य ठोस कदम उठाएगी इस  विश्वास की आशा रखते हुए गत रविवार 24 मई के दिन सलुवा छावनी के नई बस्ती में भूतपूर्व ईएफआर जवान कल्याणकारी समिति की नवगठित सलुवा शाखा द्वारा आयोजित सभा में उपस्थित सभी भूतपूर्व जवानों ने एक स्वर में तीनों बटालियन में रिक्त जवानों की पूर्ति हेतु अपने-अपने विचार रखे।
   उल्लेखनीय है कि सन् 1907 मे गठित इस पैरा मिलीटरी फोर्स अपनी आला दर्जे की ड्यूटी-परेड के साथ साथ अपनी शानदार बैंड पार्टीऔर खेल कूद के गौरवशाली परंपरा के लिए देशभर में विख्यात है।
     यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि विगत सन् 2010 के बाद से अघोषित रूप से बटालियन में नियुक्ति बंद है। जिससे बटालियन के संख्या बल में भारी कमी हो गई है। अब नाम के ही तीन बटालियन है पर प्रत्येक बटालियन की “स्वीकृत संख्या” (sanctioned strength) 824 होने की जगह वर्तमान में  तीनों बटालियन को मिलाकर भी 824 जवान नहीं हैं।  इससे अनुमान लगाना कठिन नहीं होगा कि जो जवान राज्यभर के विभिन्न इलाकों में तैनात हैं साध ही जो हेड क्वार्टर में सेवारत हैं वे सभी जवान किन परिस्थितियों में कितनी अनावश्यक तकलीफों को  सहकर- झेलकर अपने कर्त्तव्य का निर्वाह कर रहे हैं  ये तो भुक्त भोगी जवान ही जानते हैं। यह सिलसिला पिछले सोलह वर्षों से लगातार चला आ रहा है।
  यक्ष प्रश्न….. बटालियन के सेवारत जवान, अधिकारीगण हो या सेवानिवृत्त जवान तथा अधिकारीगण हो सभी इस बात से हैरान-परेशान हैं कि जब बटालियन का कमांडेंट एक competent authority का अधिकार रखता है अर्थात कमांडेंट किसी जवान को उसकी भारी गलती करने  पर उसे सेवा से बर्खास्त कर सकता है (कई जवानों की बर्खास्तगी के हम गवाह हैं) और किसी योग्य नवयुवक को नियुक्त कर सकता है तो फिर सवाल उठता है कि गत दो दशकों से ये पचासों अधिकारीगण बटालियन की रिक्तियों का मूक दर्शक बने क्यों देख रहे थे!!?  अथवा किस आदेश या नियम के चलते रिक्तियां होते रहने का तमाशा देखते रहे। या फिर किसी मध्यम कानून के तहत  ईएफआर में भर्ती लेनी ही बंद कर दी गई। कोई तो वजह होगी कि कमांडेंट रिक्तियों का प्रति इतने लापरवाह रहे कि 119 वर्षीय बटालियन इतिहास बनने की कगार तक पहुंच गया। क्योंकि हम सभी ने देखा है कि जब कभी बटालियन में रिक्तियां हुई कमांडेंट साहब ने उनकी पूर्ति बिना किसी रूकावट के तत्काल किया किया है। इतना ही नहीं जब कभी रिक्तियां अधिक हो जाया करती थी उस अवस्था में एक साथ 100/150 और 200 जवानों को भर्ती भी किया गया। ऐसी भर्तियों के लिए हममे से कई जवानों ने अपनी सेवाएं भी दी हैं। क्योंकि इन भर्तियों के लिए  दार्जिलिंग, कर्सियांग जाकर नौजवानों को चुनकर लाया जाता था। सन् 1960- 1965 के समय तो असम राज्य से भी योग्य नौजवानों क लाया गया है। बाद में असम सरकार ने अपने नौजवानों की भर्ती पर रोक लगा दी थी।
    कुल मिलाकर इस सभा में उपस्थित सभी जवानों की मांग थी कि जितनी जल्दी हो सके सरकार उच्च पदस्थ अधिकारीगण मिलकर तीनों ईएफआर बटालियन के रिक्तियों की पूर्ति हेतु रंगरूप जवानों की भर्ती की प्रक्रिया आरंभ कर बटालियन की गौरवशाली ड्यू परेड और अन्यान्य विशेषताओं को पुनर्जीवित और स्थापित करने की कृपा करेंगे। इसी आशा-विश्वास के साथ सभा का समापन हुआ।

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