वेतनमान से विश्वविद्यालय की स्वायत्तता तक, शिक्षकों के हक की आवाज बने डॉ. संजीव कुमार

ऊर्जा ऑडिटोरियम में जिला स्तरीय शिक्षक संवाद एवं सम्मान कार्यक्रम, वित्त-रहित शिक्षकों के लिए नियमित वेतन और सुरक्षित भविष्य की उठी मांग
पटना, 10 अक्टूबर। राजधानी पटना के राजवंशी नगर स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम में शनिवार को आयोजित जिला स्तरीय शिक्षक संवाद एवं सम्मान कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, प्राध्यापक, सेवानिवृत्त प्रोफेसर और शिक्षाविद शामिल हुए। कार्यक्रम में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी एवं परबत्ता के पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार ने शिक्षक समाज की समस्याओं, वित्त-रहित शिक्षण संस्थानों की स्थिति, वेतनमान, पेंशन, सेवा-सुरक्षा और विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वायत्तता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा देने का काम नहीं करते, बल्कि वे राष्ट्र के भविष्य और समाज की चेतना का निर्माण करते हैं। ऐसे में शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन, आर्थिक सुरक्षा और बेहतर सेवा शर्तें उपलब्ध कराना जरूरी है।
डॉ. संजीव कुमार ने वित्त-रहित विद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की समस्याओं पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्षों तक सेवा देने के बावजूद अनेक शिक्षक नियमित वेतन और भविष्य की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से अनुदान जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि पात्र शिक्षकों के बैंक खातों में समय पर राशि पहुंचे। लंबित बकाये के भुगतान, अनुदान वितरण की पारदर्शी व्यवस्था और नियमित वेतन की स्पष्ट समयसीमा तय करने की जरूरत है। उन्होंने वित्त-रहित एवं संबद्ध महाविद्यालयों के पात्र शिक्षकों को सम्मानजनक पारिश्रमिक और न्यायसंगत सेवा-सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय अधिनियम में प्रस्तावित बदलावों और उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा। डॉ. संजीव कुमार ने आशंका जताई कि विश्वविद्यालयों की निर्णय प्रक्रिया में अनावश्यक केंद्रीकरण से अकादमिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध और विचार-विमर्श के प्रमुख केंद्र हैं। इसलिए कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव करने से पहले शिक्षकों, विद्यार्थियों और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक संवाद होना चाहिए। उन्होंने समय पर वेतन एवं एरियर भुगतान, पुरानी पेंशन योजना, पदोन्नति और वेतन विसंगतियों का समाधान, पारदर्शी स्थानांतरण नीति, गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत तथा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग उठाने की बात कही। साथ ही विद्यालयों और महाविद्यालयों में पुस्तकालय, प्रयोगशाला तथा डिजिटल सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में प्रतिनिधित्व और जवाबदेही का सवाल भी कार्यक्रम में प्रमुखता से उठा। उपस्थित वक्ताओं और डॉ. संजीव कुमार के समर्थकों ने कहा कि शिक्षक समाज की समस्याओं को केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि पूरे कार्यकाल में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि शिक्षकों का प्रतिनिधि ऐसा होना चाहिए, जो उनके बीच नियमित रूप से उपलब्ध रहे, उनकी समस्याओं को सुने और उन्हें सरकार तथा विधान परिषद के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाए। वक्ताओं ने वित्त-रहित शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा, सम्मानजनक वेतन और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर निरंतर पहल की आवश्यकता बताई। कुछ समर्थकों ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बदलाव की उम्मीद भी व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. संजीव कुमार ने शिक्षकों, प्राध्यापकों, सेवानिवृत्त प्रोफेसरों और शिक्षाविदों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि शिक्षक समाज की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर संवाद और जवाबदेही जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक सम्मान का अर्थ केवल समारोह आयोजित करना नहीं, बल्कि समय पर वेतन, सुरक्षित भविष्य, न्यायसंगत सेवा-सुविधाएं और शैक्षणिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना भी है।

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