नई दिल्ली, अक्टूबर, 2026- माननीय केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने अंडमान संवाद 2027 के पूर्वावलोकन कार्यक्रम में एक वर्चुअल संबोधन दिया, जिसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलाव के बीच क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग, लचीली आपूर्ति श्रृंखला और सुरक्षित समुद्री कनेक्टिविटी के महत्व को रेखांकित किया गया। नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के अध्यक्ष और पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी पीवीएसएम एवीएसएम एनएम सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 20 देशों के वरिष्ठ राजनयिक, नीति निर्माता, रक्षा क्षेत्र के वरिष्ठ दिग्गज, समुद्री विशेषज्ञ, सांसद और उद्योगपति शामिल हुए।
फोरम फॉर इंटीग्रेटेड नेशनल सिक्युरिटी (एफआईएनएस) और सेंटर फॉर डोमेस्टिक इकोनॉमी पॉलिसी रिसर्च (सी-डीईपी) की एक पहल दि अंडमान डायलॉग्स की परिकल्पना इस क्षेत्र के देशों और उद्योगों के नेताओं के बीच खुली बातचीत के लिए एक वार्षिक मंच के तौर पर की गई है। इसका मकसद भविष्य की साझा क्षेत्रीय आर्थिक प्राथमिकताओं और उद्योगों के बीच आपसी सहयोग की रूपरेखा तैयार करना है। अंडमान डायलॉग्स हर साल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के स्वराज द्वीप में आयोजित किया जाएगा। अंडमान डायलॉग्स का पहला संस्करण मार्च, 2027 में ‘समुद्री संपत्तियों की मजबूती सुनिश्चित करना’ विषय के साथ आयोजित किया जाएगा।
हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाले अहम समुद्री मार्गो पर स्थित अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, व्यापार और समुद्री संपर्क पर क्षेत्रीय चर्चाओं के लिए भौगोलिक रूप से एक महत्वपूर्ण स्थान है। साथ ही ये इस बात को भी उजागर करते हैं कि भारत दक्षिण एशियाई देश होने के साथ एक दक्षिण पूर्वी एशियाई देश भी है।
उभरते वैश्विक व्यापार के माहौल में क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करना
तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी, नए आर्थिक दबाव, वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और उद्योग की मजबूती बनाए रखने के दबाव को देखते हुए इस क्षेत्र के देशों के उद्योगों और नेताओं के लिए यह बहुत आवश्यक है कि वे एक साथ आएं और आर्थिक सहयोग और ऐसे सहयोग को बढ़ावा देने वाले क्षेत्रीय ढांचों पर खुलकर बातचीत करें।
इस क्षेत्र को कई मुक्त व्यापार समझौतों से पहले ही काफी लाभ हुआ है। इस तरह के मुक्त व्यापार समझौतों के कारण कई व्यावसायिक अवसर पैदा हुए हैं। अंडमान डायलॉग्स अवसरों को खोजने और उन्हें असल में लागू करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा जिससे सप्लाई चेन के पुनर्गठन में योगदान मिलेगा।
इसके अलावा, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने की बहुत अधिक जरूरत रही है। ऐसा बदलाव जटिल है और इसके लिए एक लंबी रूपरेखा तैयार करनी होगी। अंडमान डायलॉग्स में स्थानीय मुद्रा में व्यापार को सक्षम बनाने पर बातचीत होगी।
समुद्री रास्तों के अहम संकरे रास्तों पर हाल की घटनाओं ने इस तरह की रुकावटों के परिचालन के संबंध में और आर्थिक प्रभाव पर अधिक ध्यान खींचा है। पोतों के मार्ग में परिवर्तन, बढ़ते जोखिम, बंदरगाहों पर भीड़ और पोतों की आवाजाही पर पाबंदियों का प्रभाव माल ढुलाई के खर्च, बीमा प्रीमियम और डिलीवरी कार्यक्रम पर पड़ा है। पारंपरिक व्यापारिक मार्गों में इस तरह की रुकावटों के कारण क्षेत्रीय सप्लाई चेन नेटवर्क को फिर से व्यवस्थित करने का दबाव बढ़ रहा है। दुनियाभर में मात्रा के लिहाज से वस्तुओं के व्यापार का 80 प्रतिशत से अधिक एवं डेटा ट्रांसमिशन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा समुद्री रास्तों पर निर्भर करता है। इसलिए समुद्री मार्गों में किसी भी तरह की रुकावट क्षेत्रीय प्राथमिकता का मामला बन जाता है। बढ़ते टकरावों के कारण क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की तत्काल आवश्यकता पैदा हो गई है ताकि सप्लाई चेन में रुकावटों के जोखिम को कम किया जा सके।
साथ ही, विशेष समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर और समुद्र के भीतर सुरक्षित संपर्क की बढ़ती मांग, क्षेत्रीय निवेश और सहयोग के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।
ये घटनाक्रम, देशों के लिए व्यापार संपर्क मजबूत करने, लॉजिस्टिक्स की क्षमता बेहतर करने, शिपिंग नेटवर्क में विविधता लाने और समुद्री बुनियादी ढांचे में निवेश को आसान बनाने पर विचार विमर्श करने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ प्रदान करते हैं।
एक वर्चुअल संबोधन के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए, माननीय केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा, “अंडमान संवाद विचारों का आदान-प्रदान करने, नई आर्थिक साझेदारी का पता लगाने और निष्पक्षता, विश्वास और आपसी विकास में निहित इस क्षेत्र में अधिक विश्वसनीय और विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण पर विचार-विमर्श करने के लिए सरकारों और उद्योग को एक साथ लाएगा। इस क्षेत्र में भारत की तेजी से बढ़ती आर्थिक भागीदारी और मुक्त व्यापार समझौते इस तरह के सहयोग के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी पीवीएसएम, एवीएसएम एनएम ने समुद्री संपर्क और क्षेत्रीय आर्थिक विकास के बीच संबंध पर जोर दिया। त्रिपाठी ने कहा, “महासागर शिपिंग लेन, बंदरगाहों, ऊर्जा बुनियादी ढांचों और समुद्र के नीचे के संचार नेटवर्क के जरिए हमारी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ते हैं। इस संपत्तियों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए समुद्री क्षेत्र से जुड़े पक्षों के बीच निरंतर बातचीत और सहयोग की जरूरत है। अंडमान डायलॉग्स पूरे क्षेत्र में समुद्री क्षमता और मजबूती को बढ़ाने के लिए साझा प्राथमिकताओं की समीक्षा करने और दृष्टिकोण का आदान प्रदान करने का अवसर प्रदान करता है।”
अंडमान डायलॉग्स 2027 समुद्री संपत्तियों की मजबूती पर केंद्रित होगा
इस पहले संस्करण में समुद्री संपत्तियों की मजबूती पर ध्यान दिया जाएगा और उन समुद्री प्रणालियों एवं बुनियादी ढांचे की समीक्षा की जाएगी जो क्षेत्रीय व्यापार, आर्थिक गतिविधियों और संपर्क को बढ़ावा देते हैं। ये चर्चाएं मुक्त शिपिंग मार्गों, समुद्री बुनियादी ढांचे और वित्तीय संपर्क से संबंधित चार आपस में जुड़े विषयों पर आयोजित की जाएंगी।
मुक्त जहाजरानी मार्गों में समुद्री शासन और परिचालन संबंधी तालमेल से जुड़े मुद्दे शामिल होंगे जैसे कि जरूरी समुद्री गलियारे की विश्वसनीयता, समुद्री क्षेत्र की जानकारी साझा करना और क्षेत्रीय संकट के समय तालमेल।
बुनियादी समुद्री ढाचें पर चर्चा में औद्योगिक क्षमता, बंदरगाह की मजबूती, शिपिंग की निरंतरता, जहाज निर्माण और मरम्मत क्षमताएं और समुद्र के नीचे बिछी केबलों की सुरक्षा जैसे विषय शामिल होंगे। चर्चाओं में वैश्विक कार्गो की बदलती जरूरतों और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे के विकास के अवसरों पर भी विचार किया जाएगा।
समुद्री व्यापार और बुनियादी ढांचे के लिए वित्तीय कनेक्टिविटी में सीमा-पार पूंजी प्रवाह, स्थानीय मुद्रा में व्यापार, क्षेत्रीय भुगतान प्रणालियां और जहाजों, बंदरगाहों व समुद्र के नीचे के बुनियादी ढांचे के लिए वित्तपोषण के अवसर शामिल होंगे।
मुख्य कार्यक्रम में समुद्री गतिविधियों में आने वाली रुकावटों से निपटने के लिए समन्वित प्रतिक्रियाओं पर एक टेबल-टॉप अभ्यास भी होगा। इससे प्रतिभागी परिचालन से जुड़ी बातों, जानकारी साझा करने की जरूरतों और क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करने के मौकों पर विचार कर सकेंगे।
क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग की नई सोच
इस कार्यक्रम की शुरुआत में ‘क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग की नई सोच’ पर एक परिचर्चा हुई जिसमें जिबूती, सेशेल्स और श्रीलंका के प्रतिनिधियों के साथ ही भारत सरकार के जहाजरानी महानिदेशक श्री श्याम जगन्नाथ और विदेश मंत्रालय के सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन अफेयर्स के डीन राज श्रीवास्तव शामिल हुए। इस परिचर्चा का संचालन सी-डीईपी के अध्यक्ष डॉक्टर जयजीत भट्टाचार्य ने किया और इसमें क्षेत्रीय व्यापार, समुद्री कनेक्टिविटी और आर्थिक साझीदारी को मजबूत करने के अवसरों पर बात की गई।
अंडमान डायलॉग्स का उद्देश्य लगातार बातचीत को बढ़ावा देना, क्षेत्रीय हितधारकों के बीच जुड़ाव को गहरा करना और आर्थिक सहयोग एवं साझा समृद्धि को मजबूत करने के अवसरों की तलाश करना है।