गेटफाइव के ‘गेटफाइव अपोर्चुनिटी फण्ड II को मिली सेबी की स्वीकृति; भारत की अगली पीढ़ी की उभरती कंपनियों को देगा प्रोत्साहन

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर, 2026: आज गेटफाइव फंड्स ने मार्केट रेगुलेटर सेबी से ‘गेटफाइव अपॉर्चुनिटी फंड II के लिए स्वीकृति मिलने की घोषणा की है। यह ₹500 करोड़ का ‘कैटेगरी-I अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फण्ड है, जो तेजी से बढ़ने वाली भारतीय SMEs में निवेश करेगा। यह गेटफाइव फंड्स का दूसरा फण्ड होगा, जो भारत के टियर-1 के अलावा टियर-2 और टियर-3 मार्केट की उभरती हुई कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करेगा। इसमें डिफेंस, एयरोस्पेस, स्पेस-टेक, डीप-टेक, प्रिसिजन इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, फार्मा, टेक्नोलॉजी, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंज्यूमर और रिटेल, एग्रीटेक, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन, एनर्जी और रिन्यूएबल्स, एजुकेशन और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे सेक्टर शामिल होंगे।

गेटफाइव अपॉर्चुनिटी फंड II फंड मैनेजर श्रीकांत गोयल की उसी ग्रोथ इन्वेस्टिंग फिलॉसफी V3 (V cube) फ्रेमवर्क ‘प्रमोटर के जरिए विजन, कंपनी के जरिए वैल्यू और इंडस्ट्री के जरिए वेलोसिटी’ के तहत काम करेगा, जिसने फंड I को लंबे समय में वैल्यू बनाने के लिए आकार दिया था।

फंड I का फोकस SMEs पर जारी रहेगा, और फंड II उस दायरे को बड़े पैमाने पर बढ़ाएगा।

इस फंड का मैनेजमेंट श्रीकांत गोयल के विजन के तहत किया जाएगा, जिनके पास कैपिटल मार्केट, कॉर्पोरेट फंडरेजिंग और स्ट्रक्चर्ड फाइनेंस में लगभग दो दशकों का अनुभव है। उनके नेतृत्व में गेटफाइव एक SEBI-रजिस्टर्ड मर्चेंट बैंक के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें 40 से अधिक सदस्यों वाली मर्चेंट बैंकिंग टीम है, और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से 40 से ज्यादा डेट (debt) डील्स के जरिए ₹1,500 करोड़ से अधिक जुटाने का काम किया है। उन्होंने ही गेटफाइव अपोर्चुनिटी फण्ड की भी स्थापना की, जो एक SEBI-रजिस्टर्ड कैटेगरी I AIF (वेंचर कैपिटल फंड) है, जिससे गेटफाइव की भूमिका भारत की SMEs के साथ एडवाइजरी से लेकर लॉन्ग-टर्म कैपिटल पार्टनरशिप तक बढ़ गई है।

इस विकास पर टिप्पणी करते हुए, गेटफाइव फंड्स के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री श्रीकांत गोयल ने कहा, “एसएमई में निवेश का तरीका अब परिपक्व हो गया है और आगे बहुत मौके हैं। भारत में पहले से ही कम से कम 250 अवसर मौजूद हैं और हमें उम्मीद है कि अगले तीन से चार सालों में लगभग 400 एसएमई कंपनियां बीएसई एसएमई और एनएसई इमर्ज पर लिस्ट होंगी। डेटा से पता चलता है कि लगभग 10% एसएमई कंपनियों ने अपने निवेशकों को दस गुना से ज्यादा और लगभग 5% ने बीस गुना से ज्यादा रिटर्न दिया है। एसएमई में निवेश सिर्फ लिस्टिंग वाले दिन का खेल नहीं है और निवेशकों को इसे लॉटरी नहीं समझना चाहिए। निवेशकों को बाजार के ट्रेंडों का पीछा करने के बजाय खुद रिसर्च करनी चाहिए, क्योंकि यह उनकी मेहनत की कमाई है।

निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटलों को गहराई से समझना चाहिए, इंडस्ट्री की स्टडी करनी चाहिए और उसकी स्केलेबिलिटी और मुनाफे की क्षमता का आकलन करना चाहिए। साथ ही, निवेशकों को प्रमोटर के ट्रैक रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए, क्योंकि प्रमोटर ही बिजनेस को आगे बढ़ाता है। उन्हें बैलेंस शीट को ध्यान से पढ़ना चाहिए, कंपनी की तुलना दूसरी समान कंपनियों से करनी चाहिए और सही वैल्यूएशन पर जोर देना चाहिए। रिसीवेबल्स, इन्वेंट्री और क्रेडिटर्स के बारे में बुनियादी सवाल पूछकर निवेशक लगभग 80% जोखिमों या समस्याओं (रेड फ्लैग्स) का पता लगा सकते हैं। जो निवेशक कंपनी की यात्रा से संतुष्ट हैं, उन्हें लगभग तीन साल तक निवेशित रहना चाहिए और देखना चाहिए कि कंपनी कहां तक पहुंचती है। इसी भरोसे के कारण हम अपना दूसरा फण्ड लेकर आए हैं।”

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