जयपुर। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी व भूजल मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी ने राजस्थान में सरस्वती नदी के पुर्नउत्थान हेतु परियोजना पर मंगलवार को भूजल विभाग जयपुर में विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। मंत्री महोदया ने मुख्य अभियन्ता भूजल विभाग जोधपुर को इस कार्यक्रम की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन ( DPR ) प्रस्तुत करने के निर्देश दिये, जिससे इस परियोजना को केन्द्र सरकार को शीध्र स्वीकृति हेतु अग्रेषित किया जा सके। बैठक में भूजल विभाग के द्वारा सरस्वती नदी पुर्नउत्थान परियोजना हेतु प्रस्तुतिकरण किया गया।
वैदिक सरस्वती नदी शोध संस्थान, जोधपुर के महासचिव श्री मदन ल व्यास गोपाने कहा कि पश्चिमी राजस्थान का क्षेत्र ऋग्वेद में वर्णित सभी नदियों की माता ‘‘ सरस्वती नदी’’ के प्रबल प्रवाह का साक्षी रहा है। महाभारत काल में भूगर्भीय परिवर्तनों से इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ सतलज एवं यमुना ने अपना प्रवाह मार्ग क्रमशः पश्चिमी एवं पूर्व की ओर बदल देने के कारण यह नदी लुप्त हो गई एवं इसके ऊपर रेगिस्तान का विस्तार हो गया। पुरातात्विक उत्खनन में अनेक जगह समृद्ध संस्कृति के अवशेष मिले हैं। जैसलमेर-बाडमेर क्षेत्र में मेरीन फासिल्स व देवदार वृक्षों के फासिल्स प्राप्त हुए हैं। भविष्य में इस क्षेत्र में नहर मार्ग से यातायात की सुविधा एवं नदियों को जोडने का कार्य भी प्रस्तावित किया जा सकता है।
बैठक में श्री मदन गोपाल व्यास, महासचिव, वैदिक सरस्वती नदी शोध संस्थान, जोधपुर, श्री परचुरे , क्षेत्रीय निदेशक केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड जयपुर , डॉ बी. के. भद्रा , वैज्ञानिक आर आर एस सी जोधपुर , श्री सूरजभान सिंह, मुख्य अभियन्ता भूजल विभाग जोधपुर एवं विभाग के अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थे ।