बीकानेर ब्रांड एम्बेस्सेडर तनुश्री पारीक बनी छात्राओं की रोल मॉडल

bikaner samacharबीकानेर ( मोहन थानवी ) आज की बेटियों को विशेष सहूलियत, समर्थन या संरक्षण की जरूरत नहीं है बल्कि सशक्त हो चुकी बेटियां सिर्फ समानता मांगती है, ये कहना था बीकानेर में बेटी बचाओ ब्रांड एम्बेस्सेडर तनुश्री पारीक का। वे स्वास्थ्य विभाग के पीसीपीएनडीटी व आई.ई.सी. प्रकोष्ठ द्वारा महारानी सुदर्शन महाविद्यालय की एन.एस.एस. व एन.सी.सी. ईकाई के साथ शनिवार को आयोजित बेटी बचाओ-बेटी पढाओ कार्यक्रम में छात्राओं को संबोधित कर रहीं थी। पारीक बीएसएफ में भारत की प्रथम महिला अधिकारी (ऑपरेशनल समूह) असिस्टेंट कमांडेंट हैं ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत, तहसील व जिला स्तर पर एक-एक बेटी बचाओ ब्रांड एम्बेस्सेडर बनाकर समाज की रोल मॉडल बन रही बेटियों को समाज से रू-ब-रू करवाया जा रहा है।
प्राचार्य

डॉ. उमाकांत गुप्ता ने प्रत्येक छात्रा को बेटी बचाओं के इस सन्देश को कम से कम 10 घरों तक पहुचाने का आह्वान किया।
पीसीपीएनडीटी समन्वयक महेंद्र सिंह चारण ने विचार रखे। जिला आई.ई.सी. समन्वयक मालकोश आचार्य ने बताया कि समाज में बेटियों के बढे कद और स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से बीकानेर में प्रतिवर्ष बाल लिंगानुपात में सुधार आ रहा है और पीसीटीएस के आंकड़ो में तो इस वर्ष बेटियों ने बेटों को पीछे छोड़ दिया है।
एनयूएचएम की सलाहकार नेहा शेखावत ने भी अपनी बात कही।
छात्रसंघ अध्यक्षा प्रेरणा पारीक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंजुला बारहठ ने किया । एन.एस.एस. प्रभारी डॉ. मंजू मीणा, डॉ. सीमा ओझा, एन.सी.सी. प्रभारी डॉ. विजयलक्ष्मी शर्मा, उप प्राचार्या डॉ. पुष्पा चौहान सहित महाविद्यालय की छात्राएं आयोजन की साक्षी रहीं।

दिलाई बेटी बचाने की शपथ
तनुश्री पारीक द्वारा सभी को बेटी बचाओ की शपथ भी दिलाई गई जिसमे स्वयं कन्या भ्रूण हत्या में लिप्त ना रहने, अपने पूर्ण सामर्थ्य द्वारा बेटियों को बचाने और बेटियों को समाज में पूरा सम्मान दिलाने के लिए वचनबद्ध किया गया।
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फेंको मत हमें दो
मालकोश आचार्य ने जानकारी दी कि इतनी प्रेरणा के बावजूद भी कुछ लोग होंगे जो नहीं समझेंगे तो ऐसे लोग अनचाहे नवजात शिशुओं, अधिकतर मामलों में कन्या को झाड़ी और सड़कों पर फेंकने के बजाए पीबीएम व जिला अस्पताल के पालना गृह में छोड़कर इनके सुरक्षित भविष्य का पालन सुनिश्चित कर सकते हैं। राह निकलते लोग भी पालना गृह में छोड़कर इन्हें जीवनदान दे सकेंगे इससे भी राजस्थान में बहुत सारी बेटियों को जीवन का अवसर मिल

रहा है।

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