अर्थ को व्यर्थ होने में समय नहीं लगता – आचार्य श्री शिव मुनि

bhilwara-newsआज़ाद नेब
भीलवाड़ा 10 नवम्बर जंहा संयोग वँहा वियोग हे । जो आज हे वो कल नही होगा । समय बदलते देर नही लगती है । जो नोट कल तक सब की जेब में राज करता था वो आज रद्दी का ढेर बन चुका है । सबसे ज्यादा दुखी वो लोग हे जिन्होंनेे अपने जीवन में सिर्फ धन का संग्रहण किया और आज वो समाप्त होगया । धन आयेगा चला जाएगा लेकिन जो आत्म धन हे वो कभी कोई नही ले सकता उसका मोल हमेशा बढ़ता जाएगा ।
यह कहना है जैन श्रमण संघीय आचार्य श्री शिव मुनि । आचार्य श्री गुरुवार को शिवाचार्य समवसरण में चातुर्मासिक धर्मसभा को उद्बोधित कर रहे थे उन्होंने कहा कि जीवन में धर्म और ध्यान ही हमेशा हमारे साथ रहेगा । अर्थ को व्यर्थ होने में समय नही लगता है । जीवन भर इंसान रूपये पाने के लिए भागता रहा और आज वो रूपये कागज बन गए । हमारी मान्यता क्या है ,यह आवाह्यक है । आज तक हमने रुपयों को सबकुछ मना धर्म ध्यान को नही ,शरीर को मान्यता दी और आत्मा को नहीं माना नही पहचाना । महावीर की आत्म दृष्टि को समझना आव्सह्यक हे । जीवन के सार को , सत्य को हमेशा स्वीकारना होगा । अपने स्वरूप का बोध करना आव्सह्यक है । मैं कोन हूँ , कँहा से आया हूँ ,और मुझे जाना कँहा हे जिसने इनको जान लिया उसका जीवन सफल है ।

धर्मसभा को उद्बोधित करते हुए श्रमण संघीय मानते शिरीष मुनि ने 12 तप की व्याख्या करते हुए बताया कि इंसान को अपने मन को मोड़ना हे और काया की आदत को बदलना है । काया क्लेश तप के माध्यम से काया की सुकुमालता का त्याग होता है । जो कार्य आत्मा का उपकार करेगा वो शरीर का आपकार करेगा और जो कार्य शरीर का उपकार करेगा वो आत्मा का आपकार करता है । ध्यान से दिव्य चिन्तामणि रत्न की प्राप्ति तो खल के टुकड़े भी मिल सकते हे विवेकवान व्यक्ति जो चाहे वो सुख पा सकता है ।

धर्मसभा को समित मुनि, शाश्वत मुनि , निशांत मुनि , सुद्धेश मुनि का सानिध्य प्राप्त हुआ 1

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