गुड़ानाल में धरा पर उतरी आत्मा परियोजना

IMG-20170203-WA0305बाड़मेर
ग्राम पंचायत गुड़ानाल में सरकार की बहुआयामी आत्मा परियोजना को धरा पर उतारा गया। कृषि विभाग द्वारा किसानों को एक दिवशीय प्रक्षिशण देकर जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कहि। गुड़ानाल के पूर्व सरपंच चन्द्र सिंह राजपुरोहित ने जैविक खेती को लेकर अपने अनुभव किसानों के बीच साझा किये। आत्मा परियोजना के बारे में किसानों को जानकारी देते हुए चन्द्र सिंह राजपुरोहित ने कहा कि कृषि विभाग की ओर से संचालित आत्मा परियोजना का अलग से कार्यालय खुलेगा। इससे आत्मा (एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी) की गतिविधियां अलग से संचालित होने से जिले के कृषकों को लाभ मिल सकेगा। विभाग की ओर से जिला मुख्यालय पर आत्मा के कार्यालय भवन निर्माण की स्वीकृति जारी की है। इसकी स्वीकृति के बाद विभाग की ओर से जमीन की कवायद शुरूकर दी गई है। कृषि परिवेक्षक जबराराम और राजेन्द्र प्रसाद मीणा ने कहा कि आत्मा परियोजना का अलग से कार्यालय खुलने के बाद किसानों को काफी सुविधा रहेगी। गौरतलब है कि आत्मा का कार्यालय अलग खोलने के पीछे ये मंशा है कि इसे कृषि विभाग के मुख्य विभाग के सहयोग से किसानों को नई तकनीक का ज्ञान उपलब्ध कराकर उत्पादन में बढ़ोतरी करना है। गौरतलब है कि आत्मा परिजयोजना में किसानों को नई तकनीकी के प्रशिक्षण, कृषकों का समूह गठन, खेतों में प्रदर्शन के आयोजन, शैक्षणिक भ्रमण कराना प्रमुख हैं। इसके साथ ही खेती में नवाचार कराना, जिले में नई तकनीकी को बताना आदि प्रमुख हैं।

जैविक खेती के महान लाभ :राजपुरोहित
कृषि विभाग द्वारा किसानों को एक दिवशीय प्रक्षिशण मे किसानों को जानकारी देते हुए चन्द्र सिंह राजपुरोहित ने कहा कि मिटटी की गुणवत्ता नीव है जिस पर जैविक खेती आधारित है! खेती के तरीको से कोशिश है की मिट्टी की उर्वरता का निर्माण और रखरखाव बना रहे! इसके लिए एकाधिक फसले उगाना, फसलो का परिक्रमण, जैविक खाद और कीटनाशक और न्यूनतम जुताई आदि तरीके है! मिट्टी मे मूल जैविक तत्त्व प्राकृतिक पौधो के पौष्टिक तत्त्वों से बना है, जो की हरी खाद, पशु का खाद, काम्पोस्ट और पौधो के अवशेष से बना है. ऐसी सूचना है की मिट्टी में जैविक खेती के दौरान कम घनत्व, उच्च जल धारण क्षमता, उच्च माइक्रोबियल और उच्च मिट्टी श्वसन गतिविधिया होती है. यह संकेत करता है की जैविक खेती मे मायक्रोबियल गतिविधियों से फसलो को ज्यादा मात्रा मे पोषक तत्त्व प्रदान होते है!कई अध्ययनों के अनुसार, जैविक खेती मे पारंपरिक खेती प्रणाली की तुलना मे अधिक श्रम निवेश की आवश्यकता होती है. राजपुरोहित ने कहा कि भारत जहा श्रम बेरोजगारी और अल्प रोजगार की बहुत बड़ी संख्या है जैविक खेती को आकर्षण मिलेगा! इसके अलावा क्यूंकि फसलो के विविधिकरण जैसे की अलग-अलग रोपण और कटाई के तरीके जिसके लिए और भी ज्यादा मजदुर लगते है, इससे समय-समय पर होने वाली बेरोजगारी की समस्या भी कम होती है.जैविक खेती से कई अप्रत्यक्ष लाभ दोनों किसानो और उपभोक्ताओ के लिए उपलब्ध है! जबकि उपभोक्ताओ को बेहतर स्वादिष्ट स्वाद और पोषक मूल्यों के साथ स्वस्थ आहार मीलता है, किसान परोक्ष रूप से स्वस्थ मिट्टी और कृषि उत्पादन वातावरण से लाभान्वित होते है! पारिस्थितिक पर्यटन तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है और इटली जैसे देशो मे जैविक खेती पसंदिदा स्थलों मे परिवर्तित हो गए है. पारिस्थितिक तंत्र, वनस्पति, जीव और बढती जैव विविधता और मानवजाती के परिणामी लाभ के संरक्षण, जैविक खेती के महान लाभ है जो अभी तक ठीक से जिम्मेदार हो रहे है.

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