चातुर्मास में वीतराग परमात्मा की वाणी का श्रवण, चिंतन व मनन करें

bikaner samacharबीकानेर, 7 जुलाई 2017। खरतरगच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी के सान्निध्य में शुक्रवार चातुर्मासिक चतुर्दशी से चातुर्मासकाल के विशेष नियम, साधना, आराधना, भक्ति, तपस्या व त्याग के अनुष्ठान शुरू हुए।

चातुर्मासिक चतुर्दशी पर बागड़ी मोहल्ला की धनराज ढढ्ढा की कोटड़ी में खरतरगच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी ने प्रवचन में कहा कि चातुर्मास काल हमें कषायों (काम,क्रोध, लोभ व मोह) से मुक्त रहते हुए ज्ञान, दर्शन एवं चारित्र की साधना, आराधना व भक्ति करने का संदेश देता है। श्रावक-श्राविकाएं चातुर्मास काल में समय का सदुपयोग करें तथा वीतराग परमात्मा की वाणी का श्रवण, चिंतन व मनन कर जीवन के लक्ष्य व उद्धेश्य को समझें।

आचार्यश्री ने कहा कि परमात्मा की वाणी को समझकर उसे हृदय, आचरण व जीवन में उतारें। कर्मों की निर्जरा कर सिद्ध पद प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ व साधना, आराधना व भक्ति करें। उन्होंने कहा कि दूसरो का साथ हमें भटकाता है, हमारे लक्ष्य प्राप्ति में बाधक बनता है। चातुर्मास में आत्म बोध के साथ स्वयं की पहचान करें। निज का साथ सदा आत्म कल्याण करता है तथा सिद्धों तक पहुंचाता है। चातुर्मास में वीतराग परमात्मा की वाणी व धर्म की समझ की कामना करें। धर्म व्यक्ति को श्रेष्ठ जीवन जीने की कला सिखता है। धर्म बिना व्यक्ति गरीबी, असंतोष व पीड़ा का जीवन जीता है। वह बहुमूल्य जिन्दगी को भागा दौड़ी, फाका फोड़ी व माथा फोड़ी में खत्म कर देता है।

जैनाचार्य ने कहा कि चातुर्मास के चार माह के समय में आत्मा व परमात्मा से मिलने के प्रयास व पुरुषार्थ करें। बाहरी झंझटों से मुक्त रहकर जप, तप, त्याग, साधना आराधना व भक्ति के माध्यम से देवताओं के लिए भी लिए दुर्लभ मनुष्य जीवन को सार्थक करें। समय को रोकना, पकड़ना किसी के नियंत्रण में नहीं है। आत्म चेतना से श्रेष्ठ समय का प्रबंधन करते हुए उसका सदुपयोग हर व्यक्ति कर सकता है।

प्रतिक्रमण-खरतरगच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी की निश्रा में चातुर्मास काल में प्रतिदिन शाम छह बजे महावीर भवन में तथा श्राविकाओं का रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में सामूहिक प्रतिक्रमण का होगा। श्राविकाओं की प्रतिक्रमण की क्रियाएं साध्वीश्री प्रियश्रद्धांजनाश्रीजी व साध्वीवृंद करवाएंगी।

जिन सूत्र का वांचन- आचार्यश्री गुरुपूर्णिमा शनिवार से सबुह नौ बजे से दस बजे तक धनराज ढढ्ढा कोटड़ी में ही ’’प्रशम रति सूत्र और मलय सुन्दरी के चरित्र का वांचन नियमित प्रवचनों के साथ करेंगें । सूत्रों को आचार्यश्री को प्रदान करने का लाभ पांडिचरी के प्रकाश चन्द्र गुलेचा व छतीसगढ़ के शांतिलाल श्रीमाल परिवार ने लिया है।

विशेष प्रवचन-खरतरगच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी चातुर्मास काल में ही ढढ्ढा कोटड़ी में शुक्रवार से रविवार तक अलग-अलग विषयों पर विशेष प्रवचन देंगे। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष पन्नालाल खजांची ने बताया कि शुक्रवार को वंदनावली पर तथा शनिवार को प्रश्नोतरी पर प्रवचन करेंगे। वे श्रावक-श्राविकाओं की धर्म, जीवन, आध्यात्म, साधु जीवन परिवार सहित विविध विषयों पर प्रवचन करेंगे। आचार्यश्री रविवार को घर परिवार में सुख, शांति व समृद्धि रखने, परिवार के सदस्यों में आध्यात्म, धर्म व संस्कृति के गुणों को विकसित करने के संबंध में प्रवचन करेंगे।

आध्यात्म-स्वाध्याय की कक्षाएं-खरतरगच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी के सान्निध्य में ही ढढ्ढा कोटड़ी में मुनिश्री मनित प्रभ सागर के नेतृत्व में चातुर्मासिक प्रवचन के तुरंत बाद करीब सवा दस बजे से पौने ग्यारह बजे तक आयात्म व स्वाध्याय की 40 मिनट की विशेष कक्षाएं से शुरू होगी।

– मोहन थानवी

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