श्रद्धा व शुद्ध भावों से खेती करें- डॉ.बी.आर.छींपा

20170912_093604बीकानेर, 12 सितम्बर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के राजयोग एज्यूकेशन फाउंडेशन माउंट आबू के कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग की ओर से राजस्थान सरकार के कृषि आयुक्तालय के सहयोग से संभाग में राजस्थान किसान सशक्तिकरण अभियान मंगलवार को स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ.बी.आर.छींपा के आतिथ्य में शुरू हुआ।
सार्दुल गंज स्थित ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के क्षेत्रीय केन्द्र से दिव्य किसान सेवा रथ को रवाना कर अभियान का आगाज किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में छींपा ने कहा कि विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित भारत किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं । भारत ने विश्व के अनेक देशों को भाषा, आचार, विचार,धर्म, आध्यात्म तथा जैविक,उन्नत व पारम्परिक खेती का तरीका बताया। लोकोक्ति ’’ उत्तम खेती मध्यम बाण’ का स्मरण दिलाते हुए उन्होंने कहा कि खेती करना सबसे उत्तम कार्य है। पौधों को जीव मानते हुए इनके विकास के लिए अनेक अनुसंधान हुए है। श्रद्धा, शुद्धभाव व उत्तम संस्कारों से की गई खेती अधिक विकसित होती है।
कुलपति डॉ.छींपा ने प्रधान मंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी के संदेश ’’संकल्प से सिद्धि’’ को दोहराते हुए कहा कि शुभ संकल्प से नवाचार व उत्तम कौशल से कृषि व गौपालन का कार्य करें। गौ पालन बिना जैविक खेती अधूरी रहती है। मनुष्य में परमात्मा व प्रकृति के प्रति सम्मान रखने की प्रवृति से भी बेहतर उपज के साथ प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग किया जा सकता है। परमात्मा व प्रकृति से दूर होने पर अनेक समस्याएं सामने आती है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे खेती जैसे पारमार्थिक कार्य में आगे आएं तथा नवाचार को साथ जैविक खेती को बढ़ावा दे।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की क्षेत्रीय केन्द्र प्रभारी बी.के.कमल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि दिव्य किसान सेवा रथ में किसानों को व्यसनों से मुक्त करने, उनमें अंध विश्वास एवं कुप्रथाओं का उन्मूलन करने, पारम्परिक शाश्वत यौगिक खेती अपनाकर पौष्टिक अन्न उत्पादन करने, खेती की लागत कम करने के उपाय, नकारात्मक एवं व्यर्थ चिंतन को समाप्त कर सकारात्मक सोच उत्पन्न करने, आचरण एवं विचारों की शुद्धता द्वारा प्रकृति को शुद्ध बनाने, निःशुल्क, किसान एवं पशु स्वास्थ्य चेतना संबंधी चित्र व पोस्टरों को प्रदर्शन किया जाएगा। रथ बीकानेर संभाग के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ, बीकानेर व चूरू जिलों तहसील मुख्यालय पर कहीं एक दिन व कहीं आधे दिन पड़ाव रखकर किसानों में जागृति के लिए कार्य करेगा।
बी.के.कमल ने बताया कि मंगलवार को रथ का पड़ाव उदयरामसर में रहा। उदयरामसर में ग्रामीणों ने दिव्य रथ में प्रदर्शित प्रदर्शनी को देखा तथा सराहा। बुधवार को सुबह साढ़े ग्यारह बजे जयपुर रोड पर स्थित कृषि भवन व दोपहर तीन बजे स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्व विद्यालय में रहेगा। रथ के पड़ाव पर किसानों व खेती के विकास पर चर्चा होगी तथा रथ में लगी प्रदर्शनी का किसानों को अवलोकन करवाया जाएगा।
समारोह में सूरतगढ़ की ब्रह्माकुमारी रानी ने कहा कि ब्रहमाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के 19 प्रभाग विभिन्न क्षेत्रों में शुद्ध चिंतन, वाणी व कर्म से श्रेष्ठ मानव के निर्माण में कार्य कर रहे है। विश्व विद्यालय की विश्व के 140 देशों में शाखाएं है। उन्होंने बताया कि भारत की अर्थ व्यवस्था कृषि उत्पादकता पर आधारित है। राष्ट्र को सुखी, समृद्ध बनाने के लिए किसानों को सशक्त बनाना होगा। किसान हमारे देश की शान है। इक्कीसवीं सदी के दौर में भी कई किसान अशिक्षा,अंध विश्वास और कुरीतियों की दीवारों को नहीं तोड़ सके है। किसानों के नैतिक,आर्थिक, सामाजिक और चारित्रिक विकास के लिए क्रांति के रूप में यह अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिकता द्वारा किसानों के अंतःकरण को शुद्ध बनाना, साथ ही राजयोग के अभ्यास द्वारा व्यक्ति में सद्भावना, हिम्मत, आत्म विश्वास जैसे सुषुप्त मूल्य जागृत कर किसानों को सशक्त बनाना है।
माउंट आबू से आए बी.के. सुमंत कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि किसानों की आर्थिक उन्नति करने के साथ उनमें सकारात्मक सोच विकसित करने, भूमि उपजाऊ क्षमता बढ़ाने, जैविक खेती के माध्यम से नई क्रांति लाने के संकल्प के साथ यह अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि परमात्मा का ध्यान करके सकारात्मक सोच व भावना से बीज संस्कार विविध से सशक्त व शक्ति शाली बनाया जा सकता है। कृषि कार्य हो या अन्य कार्य सभी में आस्था व विश्वास का भी प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में अज्ञानतावश वैज्ञानिक तरीकों से खेती नहीं करने, गोबर व कैचुआ खाद का खेतों में उपयोग करने की सलाह दी।
समारोह में बालिकाओं ने पेड़ों की रक्षा के संकल्प की नृत्य नाटिका मानवी बहन के निर्देशन में प्रस्तुत की गई। महसाना से आई बी.के. शीतल बहन ने राजयोग का ध्यान करवाया। शिक्षा विभाग के सेवानिवृत अधिकारी सूरजाराम राजपुरोहित ने आयोजन के महत्व को उजागर किया। हिम्मासर के किसान रामेश्वर खींचड़ ने मरुक्षेत्र में खेजड़ी व बैर के पेड़ लगाने का सुझाव दिया।
समारोह में उप निदेशक एवं परियोजना निदेशक ’’आत्मा’’ (कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण) बी.आर.कड़वा, उप निदेशक (कृषि) डॉ. उदयभान, परियोजना निदेशक आत्मा अमर सिंह गिल, सहायक निदेशक कृषि विस्तार जयदीप दोगने, स्वामी केशवानंद राज.कृषि विश्व विद्यालय की निदेशक प्लानिंग व मोनेटरिंग डॉ.मीनाक्षी चौधरी सहित अनेक कृषि वैज्ञानिक व किसान मौजूद थे।

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