(सीएमएचओ व बीसीएमओ ने किया आमजन को जागरूक)
बीकानेर। मिशन अगेंस्ट डेंगू-मलेरिया के तहत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी दल बल सहित शहर के अंदरूनी क्षेत्रों में पहुंचे और मच्छरों के खात्मे की कवायद की। दल द्वारा पारीक चैक, सोनगिरी कुआँ व आस-पास एंटी लार्वा गतिविधियाँ करते हुए बड़ी तादाद में पनप रहे मच्छरों के लार्वा नष्ट कर जन जागरण किया गया। मौके पर उपस्थित आम जन से अपने घर व आस-पास मच्छरों की रोकथाम की अपील की तथा शहर में इस मिशन को गति देने हेतु विमर्श किया। स्वास्थ्य विभाग के दल में शामिल बीसीएमओ डॉ. अनिल वर्मा, एपिडेमियोलोजिस्ट नीलम प्रतापसिंह व सहायक मलेरिया अधिकारी अशोक व्यास द्वारा सघन एंटी लार्वा गतिविधियाँ करते हुए मच्छरों के पनपने की आशंकाएं एकबारगी खत्म की। डॉ. वर्मा ने आम जन को हिदायत दी कि वे किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा मच्छर मारने का इंतजार करने की बजाय इस आसान से कार्य को नियमित रूप से स्वयं करें। घर की मटकियों, टंकियों, कुण्डियों, कूलर, फ्रिज ट्रे व पक्षियों के परिंडो में मच्छरों के लार्वा पनपते दिखाए गए और हाथों-हाथ साफ करवाए गए। पशुओं की पानी की कुण्डियों में खाद्य तेल डाला गया और हर सप्ताह इसे दोहराने का संकल्प दिलाया गया।
एंटी लार्वा गतिविधियों पर जोर
नुक्कड़ सभा करते हुए सीएमएचओ डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने आमजन को बताया कि मच्छरों की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका होता है एंटीलार्वल एक्टिीविटी, जिसके तहत् मच्छरों को पनपने से ही रोक दिया जाता है। इस क्रम में गंदे पानी के इकट्ठा होने पर एमएलओ/काला तेल/पाइरेथ्रम छिड़काव, साफ पानी के तालाबों पर बीटीआई, पेयजल में टेमीफोस, खाद्य तेल, घरों में पाइरेथ्रम स्प्रे तथा जल स्त्रोंतो में मच्छर का लार्वा खाने वाली गम्बूशिया मछली डलवाने का कार्य जोरों पर है। मिशन अगेंस्ट डेंगू-मलेरिया को और गति देने के लिए आम जन को इस मुहीम से जुड़ते हुए एंटी लार्वा गतिविधियों को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा। पक्षियों के लिए रखे जाने वाले परिंडों को सप्ताह में एक बार खाली कर उन्हें बर्तन साफ करने वाले झामे से रगड़ कर, साफ कर व सुखाकर मच्छर के अण्डे एवं लार्वा नष्ट कर पुनः भरा जाये। कूलर, फ्रीज के पीछे की ट्रे, गमले, फूलदान इत्यादि हेतु भी यही प्रक्रिया अपनानी जानी चाहिए। इसके साथ ही छत पर रखे टूटे-फूटे सामान, कबाड़-टायर इत्यादि को हटाकर पानी इक्कठा होने से रोका जाये। पानी की टंकी एवं अन्य बर्तनों को ढंक कर रखा जाये जिससे मच्छर उनमें प्रवेश कर प्रजनन न कर सकें।
– मोहन थानवी