जिले में अभियान के तृतीय चरण की सहजरासर से हुई शुरुआत
बीकानेर, 9 दिसम्बर। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान का तृतीय चरण शनिवार को प्रारंभ हुआ। पहले दिन 25 गांवों में 31 स्थानों पर जल सरंक्षण के कार्य शुरू हुए। मुख्य समारोह लूणकरनसर की ग्राम पंचायत सहजरासर में हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जल संसाधन मंत्री तथा जिला प्रभारी मंत्री डॉ. रामप्रताप ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूजन के साथ सहजरासर के पक्का जोहड़ जीर्णोंद्धार एवं क्षमता संवर्द्धन कार्य का शुभारंभ किया। प्रभारी मंत्री ने श्रमदान किया तथा पंचायत भवन में पौधारोपण भी किया। इस कार्य में बीएसएफ, पुलिस तथा आरएसी के जवानों, स्कूली विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने भी भागीदारी निभाई। स्कूली छात्राओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर, कलश यात्रा निकाली।
कालू के संत मोहनदास के सान्निध्य में आयोजित कार्यमक्रम में प्रभारी मंत्री डॉ. रामप्रताप ने कहा कि यह अभियान मुख्यमंत्री की दूरगामी सोच का परिणाम है और भावी पीढ़ियां इसे याद रखेंगी। उन्होंने कहा कि देश के अनेक राज्यों सहित विदेशों के लोग अभियान के तहत हुए कार्यों को देखने के लिए आ रहे हैं। दो चरणों में चयनित गांवों में भू-जल स्तर और हरियाली बढ़ी है। ग्रामीण, जल आत्मनिर्भर बन चुके हैं। उन्होंने इसे पुण्यदायी अभियान बताते हुए आमजन से इसमें सहयोग करने की अपील की।
संसदीय सचिव डॉ.विश्वनाथ मेघवाल ने कहा कि प्रदेश में पानी उपलब्धता की कमी, भोगौलिक परिस्थितयों एवं भू-जल उपलब्धता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों द्वारा बंूद-बूंद जल संरक्षण किया जाता था। वर्तमान में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में यह कार्य प्रारंभ हुआ है। इस अभियान की सफलता में सभी के सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अभियान के पहले चरण में 3 हजार 500 तथा दूसरे चरण में 4 हजार 200 गांवों में जल संरक्षण के कार्य हुए तथा तीसरे चरण में 4 हजार 250 गांवों में कार्य हो रहे हैं। इस अभियान की पूरे देश में सराहना हुई है तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक बताया है।
लूणकरनसर विधायक मानिक चंद सुराणा ने कहा कि यह अभियान अपने तीसरे चरण में प्रदेश के एक चौथाई गांवों तक पहंुच चुका है। यह अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि घरों एवं खेतों में बनने वाले जल कुण्डों से लाखों लीटर बरसाती जल संरक्षित होगा। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्रों में अभियान की महत्ता पर प्रकाश डाला तथा कहा कि बरसाती जल संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री की विचारधारा यदि ग्रामीण ग्रहण करेंगे तो गांव जल आत्मनिर्भर बन जायेंगे।
जिला प्रमुख सुशीला सीवर ने कहा कि अभियान के दूरगामी परिणाम सामने आएंगे। घरों के कुण्ड, छतों से जोड़कर बूंद-बूंद पानी का संरक्षण किया जायेगा। उन्होंने अभियान के तहत लगाए गए पौधों की सारसंभाल करने का आह्वान किया तथा बेटियों को पढ़ाने कीे अपील की।
सुमित गोदारा ने कहा कि लूणकरनसर के गांवों में पेयजल की समस्या के स्थाई समाधान के लिए यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा। अभियान के पहले दो चरणों में जिन गांवों में कार्य हुए हैं, वे जल आत्मनिर्भर बन चुके हैं। उन क्षेत्रों में पानी की कमी दूर हुई है। उन्होंने कहा कि तीसरे चरण के गांवों को भी इस अभियान से लाभ होगा।
जल ग्रहण के अधीक्षण अभियन्ता भागीरथ बिश्नोई ने कहा कि अभियान के पहले दो चरणों में जिले के 45 गांवों में जल संरक्षण के 7 हजार 350 कार्य हुए हैं। जिससे 70 करोड़ लीटर जल संग्रहण क्षमता बढ़ी। तीसरे चरण में भी 25 गांवों में 4 हजार 421 कार्य होंगे। इन कार्यों पर 32 करोड़ रूपये व्यय होंगे।
सरपंच नत्थी राम सीवर ने आभार व्यक्त किया तथा संचालन गोपाल जोशी ने किया।
अभियान के बने साक्षी-जल संरक्षण अभियान के तृतीय चरण में आयोजित समारोह में जिला प्रभारी सचिव नील कमल दरबारी, जिला कलक्टर अनिल गुप्ता, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजीत सिंह राजावत, सही राम दुसाद, अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक लाल चंद कायल, एसडीएम रतन लाल स्वामी सहित बड़ी संख्या में पंचायतराज जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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