डूंगर कॉलेज में डॉ. आचार्य का व्याख्यान
बीकानेर, 12 दिसम्बर। डूंगर महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के लैंग्वेज क्लब के तत्वावधान में मंगलवार को ‘साहित्य कैसे पढ़ेंं’ विषय पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नन्दकिशोर आचार्य का व्याख्यान सम्पन्न हुआ।
डॉ. आचार्य ने कहा कि साहित्य ज्ञान की अन्य शाखाओं से भिन्न एवं विशिष्ट है, यह अन्वेषण की प्रक्रिया है और मनुष्य के संवेदनात्मक एवं अनुभूत्यात्मक पक्ष से जुड़ी है। संवेदनों का ज्ञान एवं साधारणीकरण का सामथ्र्य सिर्फ साहित्य में ही सम्भव है, ज्ञान और कला की विधाओं में यह सम्भव नहीं है। साहित्यकार अन्वेषण से अनुभूति की यात्रा करता है एवं विषय और विषयी के भेद को समाप्त करता हुआ आत्मानुभूति को जगाता है। साहित्य नैतिकता से जुड़ा है और नैतिकता का अर्थ पीड़ित के साथ खड़ा होना है।
मीडिया प्रभारी डॉ. राजेन्द्र पुरोहित ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. बेला भनोत ने की। सहायक निदेशक डॉ. दिग्विजय सिंह एवं वरिष्ठ संकाय सदस्या डॉ. सरला वर्मा भी मंच पर उपस्थित थे। संचालन एवं परिचय हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी मूलचन्दानी ने दिया। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान सम्मान द्वारा सम्मानित आचार्य को हिन्दी विभाग की तरफ से शॉल, स्मृति चिन्ह एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। डॉ. अनिला कुमार बारिया ने धन्यवाद ज्ञाापित किया। इस अवसर पर महाविद्यालय संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।
– मोहन थानवी